SC: छत्तीसगढ़ सिविल जज परीक्षा के लिए नियम में दी ढील
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सिविल जज परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि भर्ती अधिसूचना अदालत के 20 मई 2025 के फैसले से पहले जारी की गई थी, तो तीन वर्ष की वकालत अनुभव की कमी के आधार पर उम्मीदवारों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता.
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को उम्मीदवारों उर्वशी कौर एवं अन्य की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया. इन याचिकाओं में 23 दिसंबर 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन में जोड़े गए पात्रता मानदंड को चुनौती दी गई थी.
अदालत ने इन उम्मीदवारों को रविवार को निर्धारित परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है, लेकिन अंतरिम निर्णय के अधीन.
अदालत ने आदेश में कहा, "अंतरिम आदेश के तहत, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग उन याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देगा, जिनके पास विज्ञापन संख्या 04/2024/एग्जाम दिनांक 23.12.2024 के खंड 3(iv)(B) को छोड़कर अन्य आवश्यक योग्यताएं हैं, अर्थात वकील अधिनियम, 1961 के तहत वकालत में नामांकन."
अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने से उम्मीदवारों को कोई अधिकार नहीं मिलेगा.
पीठ ने यह भी कहा कि चूंकि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया अदालत के 28 मई 2025 के फैसले 'ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ' से पहले शुरू हो चुकी थी, इसलिए आयोग तीन वर्ष के अनुभव की मांग नहीं कर सकता.
मामला चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है.
यह फैसला उन हजारों उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से निचली अदालतों में न्यायिक सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.