सोनम वांगचुक की रिहाई संभव नहीं, केंद्र ने SC में राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट कर दिया है कि लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को फिलहाल रिहा करना संभव नहीं है. बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि वांगचुक को पिछले साल लेह में हुई हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है.
सरकार के अनुसार, उस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिसे देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उन्हें हिरासत में रखना अनिवार्य है.
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. वीराले की पीठ ने वांगचुक की खराब सेहत का हवाला देते हुए उनकी रिहाई पर विचार करने को कहा था, लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने इस संभावना को खारिज कर दिया.
सरकार ने अदालत को बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार उनकी 24 बार जांच की जा चुकी है और वे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं.
केंद्र ने यह भी दलील दी कि वांगचुक का इलाज जयपुर के एम्स में किया जा रहा है, जो लद्दाख के किसी भी अस्पताल से बेहतर सुविधा संपन्न है.
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नियमों में इस तरह का अपवाद बनाना भविष्य के लिए सही संकेत नहीं होगा.
केंद्र सरकार और प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी के पीछे मुख्य रूप से 24 सितंबर, 2025 को लेह में हुई हिंसा को आधार बनाया है.
सरकार का दावा है कि वांगचुक ने अपने भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए युवाओं को उकसाया. सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, उन्होंने 'अरब स्प्रिंग' और नेपाल के आंदोलनों का हवाला देते हुए लद्दाख में भी वैसी ही स्थिति पैदा करने की चेतावनी दी थी, जिसे सरकार ने उकसावे की श्रेणी में माना.
24 सितंबर को लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और 'छठी अनुसूची' में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया था. इस झड़प में 4 लोगों की मौत हुई और लगभग 150 लोग घायल हुए (जिनमें कई पुलिसकर्मी भी थे). भीड़ ने भाजपा कार्यालय और सरकारी वाहनों को भी निशाना बनाया था.
सरकार का तर्क है कि लद्दाख एक संवेदनशील सीमावर्ती इलाका (चीन और पाकिस्तान की सीमा के पास) है. ऐसे में वहां अशांति फैलाना देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है, इसलिए उन पर सख्त NSA लगाया गया.
गिरफ्तारी के समय सरकार ने उनके एनजीओ (SECMOL) द्वारा विदेशी फंडिंग (FCRA) के नियमों के उल्लंघन और वित्तीय हेर-फेर के आरोप भी लगाए थे, जिसकी जांच फिलहाल चल रही है.