रायगढ़ में सात माह की हाथी शावक की डूबने से मौत
रायगढ़ में सात माह की हाथा शावक की डूबने से मौत
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवालों के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है. धरमजयगढ़ वन मंडल के अंतर्गत छाल रेंज के औरानारा क्षेत्र में 28 अक्टूबर की सुबह एक तालाब में मस्ती के चक्कर में सात माह की मादा हाथी शावक पानी में फिसल गई और डूबकर प्राण त्याग दिए.
वन अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की, जिसमें पोस्टमार्टम के बाद शव को उचित तरीके से अंतिम संस्कार दिया गया.
क्षेत्र में हाथी झुंडों की मौजूदगी को लेकर वन विभाग पहले से ही सतर्क मोड में है. मिली जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ जिले के इस हिस्से में फिलहाल 57 हाथी अलग-अलग समूहों में घूम रहे हैं, जिनमें 20 नर, 25 मादा और 12 छोटे शावक शामिल हैं.
छाल रेंज के बोजिया इलाके में दो प्रमुख दल सक्रिय हैं-एक में 19 और दूसरे में 15 सदस्य. घटना वाले दिन कक्ष संख्या 517 आरएफ के पास स्थित तालाब पर एक दल पानी पीने और नहाने के लिए पहुंचा था, जहां यह हादसा हो गया.
जंगल के किनारे रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले शावक का शव तालाब के किनारे पड़ा देखा. उन्होंने बिना देर किए हाथी मित्र दल को खबर दी, जिसकी टीम ने फौरन वन विभाग को सूचित किया.
चौंकाने वाली बात यह रही कि शावक की मौत के बाद उसके झुंड के अन्य सदस्यों ने ही उसके शव को पानी से बाहर खींचा और घंटों तक उसके चारों ओर चक्कर लगाते रहे, मानो शोक मना रहे हों. वन टीम ने सुबह होते ही पंचनामा पूरा किया और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है, लेकिन प्राकृतिक कारणों से होने वाले हादसों पर पूर्ण नियंत्रण मुश्किल है.
जिले में हाथियों की बढ़ती संख्या के बीच स्थानीय समुदाय और वन कर्मियों के बीच समन्वय को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी विपत्तियां टाली जा सकें.
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौतें: 2024 का विवरण
2024 में छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौतों का प्रमुख कारण विद्युत शॉक (electrocution) रहा, जिसमें कम से कम 13 हाथी मारे गए.
उदाहरण के लिए, रायगढ़ जिले में अक्टूबर 2024 में तीन हाथियों (जिनमें एक शावक भी शामिल था) की मौत एक लटकी हुई 11 kV बिजली लाइन से टकराने के कारण हुई, जबकि नवंबर में बिलासपुर और सूरजपुर में अन्य शावक और वयस्क हाथियों की इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गईं. कुल छह वर्षों (2019-2024) में 80 से अधिक मौतों में विद्युत शॉक सबसे बड़ा कारक रहा.
इसके अलावा, विषाक्त पदार्थ या जाल (जैसे पोटाश बम या जहर) से 1-2 मौतें हुईं, जिसमें नवंबर 2024 में रिसगांव रेंज में एक शावक शिकारियों के जाल में फंसकर घायल हो गया और अंततः झुंड द्वारा छोड़ दिए जाने के कारण मर गया. अन्य या अज्ञात कारणों (जैसे बीमारी, उम्र या अस्पष्ट) से 2-3 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें नवंबर में बालरामपुर और प्रतापपुर में हाथी शव मिले, लेकिन सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका.
कुल मिलाकर, 2024 में अनुमानित 15-20 हाथियों की मौत हुई, जो राज्य में हाथियों की बढ़ती संख्या (250-300) और मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती है.
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौतें: 2025 का अवलोकन
वर्तमान तिथि (29 अक्टूबर 2025) तक उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर, छत्तीसगढ़ में 2025 में हाथियों की मौतों का आंकड़ा सीमित है, क्योंकि पूर्ण वार्षिक रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है. हालांकि, दर्ज घटनाओं से कम से कम 2 हाथियों की मौत हुई है, जिनमें से दोनों ही मानव-हाथी संघर्ष से जुड़ी अस्वाभाविक मौतें हैं. प्रमुख कारण विद्युत शॉक (electrocution) रहा, जो राज्य में हाथी मौतों का सबसे बड़ा कारक है. नीचे विस्तार से विवरण दिया गया है:
अगस्त 2025: एक हाथी की मौत विद्युत शॉक से हुई, जब वह एक बिजली लाइन से टकराया. इस घटना के बाद तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जो संघर्ष के बाद प्रतिशोधी कार्रवाई से जुड़े थे. यह घटना मानव हताहतों (4 मौतें) के साथ जुड़ी थी, जो हाथी आक्रमणों से हुईं.
सितंबर 2025: महावीरगंज के पास एक नर हाथी का शव मिला, जो 2020 से अब तक की 32वीं अस्वाभाविक मौत थी. अधिकांश ऐसी मौतें विद्युत शॉक या जहर (poisoning) से होती हैं, हालांकि इसकी सटीक वजह स्पष्ट नहीं बताई गई.
ये मौतें रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में हुईं, जहां हाथी झुंडों की गतिविधि बढ़ रही है. पर्यावरण मंत्रालय की मार्च 2025 की रिपोर्ट (जो 2000-2023 तक के डेटा पर आधारित है) में कुल 77 मौतें विद्युत शॉक से दर्ज हैं, लेकिन 2025 का अलग डेटा नहीं है. कुल मिलाकर, 2025 में मौतों की संख्या 2024 (15-20) से कम लग रही है, लेकिन पूर्ण आंकड़े वर्षांत पर उपलब्ध होंगे. वन विभाग के प्रयासों जैसे हाथी अलर्ट सिस्टम से संघर्ष कम हो रहा है, फिर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है.