हर साल 1 अरब टन भोजन बर्बाद, फिर भी 64.5 करोड़ लोग भूखे: UN
विश्व स्तर पर हर 5 में से 1 थाली का खाना कूड़ेदान में चला जाता है.
नई दिल्ली । डेस्क: विश्व स्तर पर हर 5 में से 1 थाली का खाना कूड़ेदान में चला जाता है. एक तरफ जहां सालाना एक अरब टन से अधिक खाद्य सामग्री बर्बाद हो रही है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा दाने-दाने को मोहताज है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर में लगभग 64.5 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हुए हैं, जो वैश्विक आबादी का लगभग 7.8 प्रतिशत हिस्सा है.
भुखमरी और बर्बादी के इसी बड़े अंतर को मिटाने के उद्देश्य से इस बार विश्व खाद्य दिवस मनाया जा रहा है. 16 अक्टूबर को खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की स्थापना की याद में मनाए जाने वाले इस दिवस की इस वर्ष की थीम "आज का नवाचार, कल का पोषण" रखी गई है, जो भोजन की बर्बादी को कम करने और खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने पर जोर देती है.
भुखमरी में धीमी गिरावट, लेकिन अफ्रीका में स्थिति चिंताजनक
राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर भुखमरी के मामलों में लगातार तीसरे साल गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2022 के उच्चतम स्तर 8.6 प्रतिशत और 2024 के 8.1 प्रतिशत की तुलना में 2025 में यह घटकर 7.8 प्रतिशत पर आ गया है. हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी कोरोना महामारी से पहले के स्तर से काफी अधिक है और 2019 की तुलना में आज भी 6.1 करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में हैं.
क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो अफ्रीका महाद्वीप सबसे ज्यादा प्रभावित है. वर्ष 2025 में अफ्रीका में लगभग 30.9 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार थे, जो वहां की कुल आबादी का 20 प्रतिशत और दुनिया के कुल भूखे लोगों का लगभग आधा हिस्सा है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 के अनुसार, जिन आठ देशों में भूख की स्थिति गंभीर और चिंताजनक श्रेणी में है, उनमें से सात देश अफ्रीका के ही हैं. सोमालिया इस सूची में सबसे नीचे है, जबकि कांगो, चाड और मेडागास्कर की स्थिति भी बेहद खराब है. इसके विपरीत, एशिया में 29.2 करोड़ (6 प्रतिशत) और लैटिन अमेरिका में 3.2 करोड़ लोग (4.8 प्रतिशत) कुपोषण का सामना कर रहे हैं.
खेत से लेकर रसोई तक बर्बादी का बड़ा जाल
भोजन की बर्बादी खेत से लेकर ग्राहक की थाली तक हर चरण में होती है. एफएओ के अनुसार, कटाई के बाद और दुकानों तक पहुंचने से पहले ही लगभग 13 प्रतिशत भोजन खराब हो जाता है. भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण के दौरान होने वाले इस नुकसान की आर्थिक कीमत सालाना 400 अरब डॉलर से भी अधिक है. सबसे ज्यादा नुकसान ताजे फलों और सब्जियों को होता है.
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, खुदरा दुकानों, रेस्तरां और घरों में उपलब्ध कुल भोजन का लगभग पांचवां हिस्सा फेंक दिया जाता है. वर्ष 2022 में यह बर्बादी लगभग 1.05 अरब टन रही, जो 20 टन क्षमता वाले 5.25 करोड़ ट्रकों के बराबर है. चौंकाने वाली बात यह है कि खाद्य बर्बादी में सबसे बड़ा 60 प्रतिशत योगदान आम घरों का है, जबकि रेस्तरां और खाद्य सेवाएं 28 प्रतिशत और दुकानें 12 प्रतिशत बर्बादी के लिए जिम्मेदार हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर गहराता संकट
भोजन फेंकने का सीधा मतलब उस पैसे, जमीन और ऊर्जा को बर्बाद करना है जो इसे उगाने में इस्तेमाल हुई थी. खाद्य हानि और बर्बादी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान होता है. दुनिया की 28 प्रतिशत कृषि भूमि यानी 1.4 अरब हेक्टेयर जमीन पर ऐसा भोजन उगाया जाता है जो कभी खाया ही नहीं जाता. यह क्षेत्रफल कनाडा देश से भी बड़ा है. इसके अलावा, लैंडफिल में सड़ते भोजन से निकलने वाली मीथेन गैस और अन्य कारणों से खाद्य बर्बादी कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 8 से 10 प्रतिशत का योगदान देती है.
प्रति व्यक्ति बर्बादी के मामले में मालदीव सबसे आगे है, जहां हर व्यक्ति सालाना 260 किलोग्राम भोजन बर्बाद करता है. इसके बाद सीरिया, डोमिनिकन गणराज्य, मैक्सिको और ट्यूनीशिया का नंबर आता है. वहीं स्पेन जैसे देश में यह बर्बादी सबसे कम (39 किलोग्राम प्रति व्यक्ति) दर्ज की गई है.
घरेलू स्तर पर बर्बादी रोकने के व्यावहारिक उपाय
चूंकि भोजन की सबसे ज्यादा बर्बादी घरों में होती है, इसलिए आम नागरिक अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाकर बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं. विशेषज्ञ खरीदारी से पहले रसोई का जायजा लेने और आवश्यकतानुसार योजना बनाने की सलाह देते हैं. एक्सपायरी डेट को सही से समझना भी जरूरी है, क्योंकि 'बेस्ट बिफोर' तिथि का मतलब गुणवत्ता से होता है, न कि भोजन के तुरंत खराब होने से.
इसके अलावा, फ्रिज का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस या उससे कम रखकर ताजे फल-सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. पके हुए भोजन, ब्रेड और मांस को खराब होने से बचाने के लिए फ्रीजर का उपयोग करना, खाना बनाते समय चावल और पास्ता जैसी चीजों का सही माप लेना और पुराने सामान का पहले इस्तेमाल करना बेहद कारगर साबित होता है. बची हुई सामग्री से नई डिश बनाना और सब्जियों के छिलकों का कंपोस्ट बनाकर कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोका जा सकता है.