लोकसभा में 'वंदे मातरम' पर बवाल: विपक्ष ने BJP को घेरा
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर सोमवार 8 दिसंबर, 2025 को लोक सभा में हुई बहस ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. जब विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर देश के प्रतिष्ठित नेताओं के "विनियोग" (appropriation) और राष्ट्रीय गीत का इस्तेमाल वोट की राजनीति के लिए करने का आरोप लगाया.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सदस्य काकोली घोष दस्तीदार ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि "वंदे मातरम न केवल भारत का राष्ट्रीय गीत था, बल्कि एक ऐसी विरासत थी जिसे लाखों लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम को बढ़ावा देने के लिए गाया था." उन्होंने कहा कि आज सत्ता में बैठे लोग इस भावना को समझने में विफल हैं, और सावरकर जैसे लोगों के जेल में रहते हुए "दया याचिकाएं" लिखने के विपरीत, स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को 'बंकिम दा' कहने पर भी आपत्ति जताई, इसे साहित्यिक दिग्गज का "अपमान" बताया.
समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष बार-बार ऐसे प्रतिष्ठित नेताओं को "विनियोग" करने की कोशिश करता है, जिनका उनसे कभी कोई संबंध नहीं रहा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का उपयोग किसी के विश्वास को दूसरों पर थोपने के लिए एक उपकरण के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.
कांग्रेस के उप-नेता गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री मोदी पर हर मुद्दे पर जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पार्टी का नाम लेने की आदत बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि BJP के राजनीतिक पूर्वजों ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया था.
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर वोटों के लिए राष्ट्रीय गीत का भी राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया, कहा कि "मातृभूमि के प्रति भक्ति का उपयोग वोटों के लिए किया जा रहा है." उन्होंने कहा, "कुछ लोग 'वंदे मातरम' से ज्यादा 'वंदे वोटरम' का उच्चारण करते हैं."
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के सदस्य ए. राजा ने ऐतिहासिक रूप से दावा किया कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत में 'वंदे मातरम' को इस तरह से पेश किया गया था जिसने मुस्लिमों को बाहर कर दिया, और आरोप लगाया कि इस गाने को "केवल हिंदुओं का" बनाने वाले लोग ही विभाजन के लिए जिम्मेदार हैं.
जवाब में, BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' उन्हें ऊर्जा देता है, जबकि विपक्ष के कुछ लोगों को इससे "एलर्जी" है.
AIMIM के सदस्य असद उद्दीन ओवैसी ने बहस के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत में लोकतंत्र तभी बचा है जब राज्य और धर्म को अलग रखा गया है.