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RSS प्रमुख भागवत ने नेहरू की बात दोहराई, कहा- "विविधता में भी एकता है"

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26 अग. 2025, 06:42 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

मोहन भागवत
मोहन भागवत

नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को दिल्ली में संगठन के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक व्याख्यान श्रृंखला में कहा कि "एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है; विविधता में भी एकता है. विविधता एकता का ही परिणाम है." 


यह वाक्यांश, जिसे आमतौर पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जोड़ा जाता है, को आरएसएस प्रमुख ने दोहराया, जिन्हें अक्सर नेहरू के विचारों की आलोचना करने वाली सरकार का समर्थन करने के लिए जाना जाता है.

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भागवत ने इससे पहले भी भारत की "विविधता में एकता" की संस्कृति पर जोर दिया है. 


इस महीने की शुरुआत में, नागपुर के भगवान नगर में 'धर्मजागरण न्यास' के नए कार्यालय के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा था, "सनातन धर्म का सार विविधता को गर्मजोशी और सम्मान के साथ स्वीकार करने में निहित है." 


उन्होंने आगे कहा, "भेदों के बावजूद, भारत के लोग अंततः एक हैं. विविधता को स्वीकार करना सच्चा धर्म है. यह केवल भगवान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए है. सही भावना से इसका पालन करने पर धर्म संतुलन और शांति लाता है."


दिल्ली में अपने भाषण में, भागवत ने यह भी जोर दिया कि आरएसएस पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि धारणाओं पर. उन्होंने कहा, "आरएसएस पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि धारणाओं पर."


भारत की सभ्यता की निरंतरता का जिक्र करते हुए, भागवत ने कहा कि पिछले 40,000 वर्षों से भारत में रहने वाले लोगों का डीएनए एक है और "हमारी संस्कृति एक साथ रहने की है." 


उन्होंने भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए कहा, "भारतीय दर्शन का आधार है 'मैं सभी में हूं और सभी मुझमें हैं,' जो प्रत्येक व्यक्ति को समाज का अभिन्न अंग मानता है और इसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP