प्रसिद्ध उर्दू शायर बशीर बद्र का भोपाल में निधन
भोपाल । डेस्क: मशहूर और हरदिल अजीज उर्दू शायर बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद भोपाल में निधन हो गया है. वह पिछले काफी समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से पीड़ित थे. उनके निधन की खबर से उर्दू साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है. बशीर बद्र के जाने से आधुनिक उर्दू गजल के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है.
15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर अपनी सेवाएं दीं.
बाद में वह भोपाल आ गए और जीवन का एक लंबा हिस्सा यहीं बिताया.
बशीर बद्र को उर्दू शायरी को आम लोगों के करीब लाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने पारंपरिक और क्लिष्ट भाषा के बजाय बेहद सरल, बोलचाल की भाषा और रूमानी अंदाज में अपनी बात कही, जो सीधे लोगों के दिलों को छू गई.
उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं. "उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए" जैसी उनकी कालजयी पंक्तियां हमेशा के लिए अमर हो चुकी हैं.
उर्दू साहित्य में उनके बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका था. भले ही आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शायरी और गजलें आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी.