सिनेमा जगत का एक अनूठा स्तंभ नाना पाटेकर — उनके 10 डायलॉग
रायपुर । सीजीखबर डेस्क: भारतीय सिनेमा के जाने-माने और अपने अनूठे अभिनय व संवाद अदायगी के लिए प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा (कार्डिएक अरेस्ट) पड़ने से निधन हो गया है. 75 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. महाराष्ट्र सरकार ने उनके सिनेमा और रंगमंच में अद्वितीय योगदान को देखते हुए उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने की घोषणा की है.
अपनी कड़क आवाज, तीखे डायलॉग डिलीवरी और यथार्थवादी अभिनय शैली से उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया.
नाना पाटेकर के 10 आइकॉनिक डायलॉग: किस फिल्म में, किस मौके पर कहे गए?
1. "आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने..."- फिल्म: क्रांतिवीर (1994)
मौका/प्रसंग: फिल्म के क्लाइमेक्स दृश्य में जब नाना पाटेकर (प्रताप) को फांसी के फंदे पर लटकाने की तैयारी हो रही होती है, तब वे तमाशबीन बनी भीड़ और समाज की नपुंसकता व चुप्पी पर कड़ा प्रहार करते हुए यह संवाद बोलते हैं.
2. "एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है!"- फिल्म: क्रांतिवीर (1994)
मौका/प्रसंग: जब वे भ्रष्टाचार और समाज की छोटी-छोटी समस्याओं के सामने घुटने टेकने वाली आम जनता की मानसिकता पर व्यंग्य करते हुए यह बात कहते हैं.
3. "हिंदू का खून, मुसलमान का खून... बताओ इसमें कौन सा हिंदू का है, कौन सा मुसलमान का?"- फिल्म: क्रांतिवीर (1994)
मौका/प्रसंग: सांप्रदायिक दंगों के बीच नाना पाटेकर अपने और एक अन्य व्यक्ति के हाथ की नस काटकर खून मिलाकर दिखाते हैं और धर्म के नाम पर लड़ने वालों को इंसानियत का पाठ पढ़ाते हैं.
4. "भगवान का दिया हुआ सब कुछ है... दौलत है, शोहरत है, इज्जत है..."- फिल्म: वेलकम (2007)
मौका/प्रसंग: डॉन उदय शेट्टी (नाना पाटेकर) अपनी बहन की शादी के लिए एक सीधे-सादे परिवार की तलाश में जब मजनू भाई (अनिल कपूर) के साथ बैठकर अपनी हैसियत और इच्छा जाहिर करता है.
5. "कंट्रोल मजनू, कंट्रोल!"- फिल्म: वेलकम (2007)
मौका/प्रसंग: जब मजनू भाई (अनिल कपूर) बात-बात पर गुस्सा हो जाते हैं या पेंटिंग/मारपीट के मूड में आते हैं, तब उदय शेट्टी (नाना पाटेकर) खुद को और मजनू को शांत रखने के लिए यह कॉमिक डायलॉग बोलते हैं.
6. "सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा देश महान!"- फिल्म: तिरंगा (1992)
मौका/प्रसंग: कड़क पुलिस अधिकारी शिवाजीराव वागले के रूप में नाना पाटेकर भ्रष्ट नेताओं और समाज में फैले भ्रष्टाचार पर तंज कसते हुए यह संवाद बोलते हैं.
7. "अपना तो सिद्धांत है... ना मारो, ना मारने दो."- फिल्म: तिरंगा (1992)
मौका/प्रसंग: फिल्म में अपने काम करने के सख्त, ईमानदार और बेबाक अंदाज को गुंडों व भ्रष्ट अफसरों के सामने बयां करते हुए.
8. "यह कानून का हाथ है या गुंडों की लाठी?"- फिल्म: परिंदा (1989)
मौका/प्रसंग: अंडरवर्ल्ड डॉन अन्ना सेठ का किरदार निभाते हुए नाना पाटेकर अपने खौफनाक और आक्रामक तेवर में यह संवाद बोलते हैं, जिसने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलवाया था.
9. "साले अपने ही देश में शरणार्थी बने बैठे हैं!"- फिल्म: प्रहार: द फाइनल अटैक (1991)
मौका/प्रसंग: मेजर चौहान के किरदार में नाना पाटेकर देश के अंदर छिपे गद्दारों, अपराधियों और आम लोगों की कायरता पर करारा प्रहार करते हुए सैनिक का दर्द बयां करते हैं.
10. "मुझे शहर की हवा रास नहीं आती..."- फिल्म: खामोशी: द म्यूजिकल (1996)
मौका/प्रसंग: एक मूक-बधिर (गूंगे और बहरे) पिता की भूमिका में अपनी बेटी के प्रति अपनी भावनाएं और शहर की जिंदगी से अपनी दूरी को व्यक्त करते हुए.