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RBI का 'खोया धन वापसी' अभियान: छत्तीसगढ़ में 706 Cr का दावा संभव

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29 अक्टू. 2025, 03:37 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

रुपया
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नई दिल्ली/रायपुर । डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देशभर में 'खोया धन वापसी' नामक एक अनोखा अभियान चला रखा है, जो अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक चलेगा. इस पहल के तहत लाखों बंद पड़े या सुस्त खातों में जमा धनराशि को उनके मालिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. 


खासकर छत्तीसगढ़ में यह अभियान जोर पकड़ चुका है, जहां 18 लाख से अधिक निष्क्रिय बैंक खाते सामने आए हैं. इनमें कुल 706 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है. सवाल उठता है कि आखिर इन 'गुमशुदा' पैसों का हकदार कौन बनेगा? अच्छी खबर यह है कि मालिक खुद ही अपना हकदार बन सकते हैं, बशर्ते वे सही कदम उठाएं.

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आरबीआई के अनुसार, यदि किसी बैंक खाते में 24 महीनों तक कोई जमा-निकासी या लेन-देन न हो, तो वह 'सुस्त' या निष्क्रिय घोषित हो जाता है. लेकिन चिंता न करें, यह पैसा कहीं गायब नहीं होता. खाता धारक इसका दावा कर सकता है. हालांकि, यदि यह राशि 10 वर्षों से अधिक समय से जमा पड़ी है, तो आरबीआई इसे अपने संरक्षण में ले लेता है और 'जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष' (डीईएएफ) में स्थानांतरित कर देता है. 


यह कोष आरबीआई की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो निष्क्रिय खातों से वसूली गई धनराशि का उपयोग ग्राहकों को बैंकिंग साक्षरता प्रदान करने और जागरूकता फैलाने के लिए करता है.


अब सवाल यह है कि इन पैसे को कैसे पुनः प्राप्त किया जाए? प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है. सबसे पहले आरबीआई के यूनिफाइड डोरमेंट अकाउंट्स एंड इनएक्टिव किट्स मैनेजमेंट पोर्टल पर जाएं. यहां पैन कार्ड, आधार या नाम के आधार पर लॉगिन करें और अपना खाता ट्रेस करें. यदि राशि डीईएएफ में चली गई है, तो तुरंत पता चल जाएगा.


इसके बाद, संबंधित बैंक की शाखा या आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क करें. बैंक से दावा फॉर्म प्राप्त करें, उसे सावधानीपूर्वक भरें और जमा करें. साथ ही, पहचान पत्र (जैसे आधार या वोटर आईडी) और पते का प्रमाण (जैसे बिजली बिल या राशन कार्ड) जैसे केवाईसी दस्तावेज संलग्न करें. 


बैंक की ओर से सत्यापन के बाद, आपकी धनराशि सीधे खाते में जमा कर दी जाएगी. आरबीआई ने सलाह दी है कि ग्राहक जल्दबाजी न करें, लेकिन देरी भी न करें, क्योंकि यह अवसर सीमित समय का है.


यह अभियान न केवल आर्थिक हानि को रोकता है, बल्कि लाखों लोगों को उनकी भूली हुई संपत्ति से जोड़ता भी है. यदि आपका कोई पुराना खाता दिमाग में आ रहा है, तो आज ही जांच शुरू करें. अधिक जानकारी के लिए आरबीआई की वेबसाइट या नजदीकी बैंक शाखा से जुड़ें.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP