छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से अधिक कैदी: HC ने सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के जेलों में ओवरक्राउडिंग की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है
बिलासपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जेलों में ओवरक्राउडिंग की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है. राज्य की जेलों में स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक कैदी बंद हैं, जिसको लेकर मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की युगल पीठ ने स्वतः संज्ञान याचिका (जनहित याचिका) पर सुनवाई की.
मामले में मुख्य सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 2 दिसंबर 2026 तय की है.
राज्य सरकार द्वारा अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में केंद्रीय, जिला और उप-जेलों को मिलाकर कुल 33 जेलें संचालित हैं. इन जेलों की कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 15,000 बंदियों की है, लेकिन 30 सितंबर 2026 तक इनमें 22,980 कैदी निरुद्ध हैं.
जेलों पर बढ़ रहे इस अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए सरकार की ओर से बेमेतरा जिले के पथरा गांव में 200 कैदियों की क्षमता वाले एक नए खुले सुधार गृह (ओपन जेल) की स्थापना की गई है. इस केंद्र के लिए प्रशासनिक स्तर पर पदों की मंजूरी और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि इसे जल्द से जल्द पूर्ण रूप से चालू किया जा सके.
जेलों में क्षमता घटाने के प्रयासों के साथ-साथ राज्य सरकार कैदियों के पुनर्वास और कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है. बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने और रिहाई के बाद उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ समझौते (MoU) किए गए हैं.
इसके अतिरिक्त, कैदियों के पारिश्रमिक में संशोधन करने और रिहाई के बाद उनके लिए स्वरोजगार हेतु बैंक ऋण उपलब्ध कराने जैसी योजनाएं भी विचाराधीन हैं. उच्च न्यायालय इस पूरे मामले और जेल सुधारों की प्रगति की निरंतर निगरानी कर रहा है.