छत्तीसगढ़ में शोर नियंत्रण कानून में बदलाव की तैयारी
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार चार दशक पुराने 'कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985' में बड़े बदलाव करने जा रही है. राज्य सरकार ने बिलासपुर हाई कोर्ट को सूचित किया है कि इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव अपने अंतिम चरण में है. ड्राफ्ट कमेटी ने इस पर व्यापक विचार-विमर्श और हर धारा की बारीकी से समीक्षा पूरी कर ली है.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष ध्वनि प्रदूषण को लेकर की गई एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह अहम जानकारी दी गई.
गृह विभाग के प्रधान सचिव द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे में बताया गया कि कानून को प्रभावी बनाने के लिए मई और जून के महीनों में लगातार कई बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें फील्ड अधिकारियों और विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों को शामिल कर जरूरी संशोधन किए गए हैं.
सरकार ने अदालत को आगामी प्रक्रिया का रोडमैप भी बताया. ड्राफ्ट कमेटी और गृह विभाग से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इस संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा.
कैबिनेट से पास होने के बाद इसे छत्तीसगढ़ विधानसभा के पटल पर लाया जाएगा, जहाँ विधिवत पारित होने और गजट में प्रकाशित होने के बाद यह नया कानून पूरे राज्य में लागू हो जाएगा.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इन प्रयासों को रिकॉर्ड पर लेते हुए संतोष जताया कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से काम कर रही है. हालांकि, कोर्ट ने इस दिशा में हो रही प्रगति की लगातार निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले एक नया हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है, जिसमें अब तक के अपडेट्स की जानकारी मांगी गई है.
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.