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अमरीका की ईरान पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ गिराने की तैयारी

अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढाँचे और परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए अपने सैन्य शस्त्रागार के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम का इस्तेमाल करने की गुप्त योजना तैयार की है.

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17 अक्टू. 2026, 12:25 AM 3 मिनट में पढ़ें 19

मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स
मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढाँचे और परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए अपने सैन्य शस्त्रागार के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम का इस्तेमाल करने की गुप्त योजना तैयार की है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दोबारा सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ इस विनाशकारी हथियार को तैनात कर सकती है. हालांकि, इस संभावित कदम ने वैश्विक राजनीति और सैन्य विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या यह हमला वास्तव में अमेरिका के रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करेगा या केवल एक राजनीतिक दिखावा साबित होगा.

क्या है 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' और कितनी है इसकी मारक क्षमता


इस विशालकाय हथियार का आधिकारिक नाम ‘GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट’ (MOAB) है, जिसे बोलचाल की भाषा में ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है. लगभग 10 टन वजनी यह बम करीब 9 मीटर लंबा है, जो किसी छोटी नौका के बराबर दिखाई देता है. इसके भीतर 8,500 किलोग्राम से अधिक उच्च क्षमता वाला विस्फोटक भरा होता है. इस हथियार का नाम 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन द्वारा कहे गए शब्द ‘मदर ऑफ ऑल बैटल्स’ के संदर्भ में रखा गया था.

अपनी विशाल बनावट और अत्यधिक वजन के कारण इसे किसी सामान्य स्टील्थ बॉम्बर से नहीं गिराया जा सकता, बल्कि इसके लिए लॉकहीड C-130 हर्कुलिस परिवहन विमान की आवश्यकता होती है. यह बम जमीन पर टकराने के बजाय सतह से कुछ फीट ऊपर ही हवा में फट जाता है. इसके धमाके से उठने वाली भीषण लपटें और शॉकवेव एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर इमारत, गुफा के मुहाने और सतह पर मौजूद सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर देती हैं.

ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों पर कितना असरदार?


सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि MOAB का मुख्य उद्देश्य जमीन के ऊपर बड़े पैमाने पर तबाही मचाना है, लेकिन ईरान के मामले में इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने, जैसे कि फ़ोर्डो कॉम्प्लेक्स और पिकैक्स माउंटेन के नीचे निर्माणाधीन साइट, पहाड़ों के गहराई में बेहद मजबूत कंक्रीट सुरक्षा कवच के साथ बनाए गए हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, MOAB कोई 'बंकर बस्टर' बम नहीं है जो गहरे पत्थरों और कंक्रीट को भेदकर अंदर तक तबाही मचा सके. गहराई में छिपे ठिकानों को नष्ट करने के लिए अमेरिका के पास GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर मौजूद है, जो 200 फीट गहराई तक जाकर विस्फोट कर सकता है. ऐसे में ईरान के कठिन पहाड़ी इलाकों और गहराई में बसे ठिकानों के खिलाफ MOAB का इस्तेमाल एक प्रभावी सैन्य रणनीति के बजाय महज एक बड़ा राजनीतिक तमाशा बनकर रह सकता है, जिससे अमेरिका को कोई ठोस कूटनीतिक बढ़त नहीं मिलेगी.

ईरान की संभावित प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा


यदि अमेरिका इस घातक बम का इस्तेमाल करता है, तो मध्य पूर्व में एक व्यापक और अनियंत्रित युद्ध छिड़ने का अंदेशा है. ईरानी सुरक्षा अधिकारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिकी हमले की सूरत में वे पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाएंगे. ईरान की ओर से यह संकेत भी मिले हैं कि वह क्षेत्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे संचार केबल्स, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्रों को पंगु बना सकता है.

इसके साथ ही, ईरान ने अमेरिका के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए भारी मात्रा में हथियारों का भंडारण कर लिया है और अपने परमाणु ठिकानों की किलेबंदी मजबूत कर ली है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका द्वारा इस महाविनाशकारी बम का प्रयोग क्षेत्र में शांति स्थापित करने के बजाय एक नए और अधिक भयावह संघर्ष को जन्म दे सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP