इंद्रावती जल विवाद और बाढ़ पर छत्तीसगढ़ में सियासत गरमाई
जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में इंद्रावती नदी के जल बंटवारे और हाल ही में आए बाढ़ के हालातों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है.
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाने से पहले इस मुद्दे के ऐतिहासिक पहलुओं को समझना चाहिए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि ओडिशा से पानी छोड़े जाने का पूर्वानुमान प्रशासन को तीन-चार दिन पहले ही मिल चुका था और लगातार हुई मूसलाधार बारिश एक प्राकृतिक चक्रवाती आपदा थी.
भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि इंद्रावती नदी की वर्तमान स्थिति के लिए कांग्रेस का पुराना शासनकाल ही जिम्मेदार है.
उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्रियों नंदिनी सत्पथी और प्रकाश चंद्र सेठी के दौर में हुए समझौतों के कारण ही बस्तर को अपने हक का पानी नहीं मिल पाया.
जहां ओडिशा ने नदी पर कई बांध बनाकर अपने जल संसाधनों को मजबूत कर लिया, वहीं बस्तर में इंद्रावती के पानी का संरक्षण और बेहतर उपयोग नहीं हो सका. नतीजतन, गर्मी के दिनों में प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगता है.
जगदलपुर में एक पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मांग की थी कि सरकार इंद्रावती नदी के पानी के वितरण की वास्तविक स्थिति को पारदर्शी बनाए.
बैज ने प्रशासन के सूचना तंत्र को विफल बताते हुए कहा था कि अगर सही समय पर बाढ़ और जलभराव का अलर्ट जारी किया जाता तो बड़े नुकसान को टाला जा सकता था. साथ ही कांग्रेस ने बाढ़ से प्रभावित हुए परिवारों का घर-घर जाकर सर्वे कराने और उनके पुनर्वास तक राशन व रहने की समुचित व्यवस्था प्रदान करने की अपील भी की थी.