हर भारतीय का खून खौल रहा है-मोदी
नई दिल्ली | डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा है कि "आतंकवादी हमले की तस्वीरें देखकर हर भारतीय का खून खौल रहा है. पीड़ितों को भरोसा दिलाता हूँ कि न्याय मिलेगा."
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहलगाम हमले के अपराधियों और सरपरस्तों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.
पीएम मोदी ने कहा, "पहलगाम में हुआ ये हमला, आतंक के सरपरस्तों की हताशा को दिखाता है, उनकी कायरता को दिखाता है... आतंकी और आतंक के आका चाहते हैं, कश्मीर फिर से तबाह हो जाए और इसलिए इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दिया. आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में देश की एकता, 140 करोड़ भारतीयों की एकजुटता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है. यही एकता, आतंकवाद के खिलाफ हमारी निर्णायक लड़ाई का आधार है. "
प्रधानमंत्री ने कहा- "मैं पीड़ित परिवारों को फिर भरोसा देता हूं कि उन्हें न्याय मिलेगा, न्याय मिलकर रहेगा. इस हमले के दोषियों और साज़िश रचने वालों को कठोरतम जवाब दिया जाएगा."
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के हम लोगों में जो आक्रोश है, वो आक्रोश पूरी दुनिया में है. इस आतंकी हमले के बाद लगातार दुनिया-भर से संवेदनाएं आ रही हैं. मुझे भी Global leaders ने phone किए हैं, पत्र लिखे हैं, संदेश भेजे हैं. इस जघन्य तरीके से किए गए आतंकी हमले की सब ने कठोर निंदा की है. उन्होंने मृतकों के परिवारजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं. पूरा विश्व, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में, 140 करोड़ भारतीयों के साथ खड़ा है."
प्रधानमंत्री ने देश के महान वैज्ञानिक डॉ. के कस्तूरीरंजन के निधन पर शोक जताते हुए कहा-"विज्ञान, शिक्षा और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई देने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उनके नेतृत्व में ISRO को एक नई पहचान मिली. उनके मार्गदर्शन में जो space programme आगे बढ़े, उससे भारत के प्रयासों को global मान्यता मिली. आज भारत जिन satellites का उपयोग करता है, उनमें से कई डॉ० कस्तूरीरंगन की देखरेख में ही launch की गई थी."
नरेंद्र मोदी ने पेड़ों की ज़रुरत बताते हुए कहा कि धरती की सेहत ठीक रखने के लिए, Climate Change की चुनौतियों से निपटने के लिए, और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए, पेड़ जरूर लगाएं ‘एक पेड़ - माँ के नाम’.
प्रधानमंत्री ने बापू के चंपारण सत्याग्रह को याद करते हुए कहा-"साल 1917, अप्रैल और मई के यही दो महीने - देश में आजादी की एक अनोखी लड़ाई लड़ी जा रही थी. अंग्रेजों के अत्याचार उफान पर थे. गरीबों, वंचितों और किसानों का शोषण अमानवीय स्तर को भी पार कर चुका था. बिहार की उपजाऊ धरती पर ये अंग्रेज किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे. नील की खेती से किसानों के खेत बंजर हो रहे थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को इससे कोई मतलब नहीं था. ऐसे हालात में, 1917 में गांधी जी बिहार के चंपारण पहुंचे हैं | किसानों ने गांधी जी को बताया – हमारी जमीन मर रही है, खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है. लाखों किसानों की उस पीड़ा से गांधी जी के मन में एक संकल्प उठा. वहीं से चंपारण का ऐतिहासिक सत्याग्रह शुरू हुआ ‘चंपारण सत्याग्रह’."
नरेंद्र मोदी ने कहा-"ये बापू द्वारा भारत में पहला बड़ा प्रयोग था. बापू के सत्याग्रह से पूरी अंग्रेज हुकूमत हिल गई. अंग्रेजों को नील की खेती के लिए किसानों को मजबूर करने वाले कानून को स्थगित करना पड़ा. ये एक ऐसी जीत थी जिसने आजादी की लड़ाई में नया विश्वास फूंका. आप सब जानते होंगें इस सत्याग्रह में बड़ा योगदान बिहार के एक और सपूत का भी था, जो आजादी के बाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. वो महान विभूति थे – डॉ० राजेन्द्र प्रसाद. उन्होंने ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर एक किताब भी लिखी – ‘Satyagraha in Champaran’, ये किताब हर युवा को पढ़नी चाहिए ."
मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा-"अप्रैल में ही स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कई और अमिट अध्याय जुड़े हुए हैं. अप्रैल की 6 तारीख को ही गांधी जी की ‘दांडी यात्रा’ संपन्न हुई थी. 12 मार्च से शुरू होकर 24 दिनों तक चली इस यात्रा ने अंग्रेजों को झकझोर कर रख दिया था. अप्रैल में ही जलियाँवाला बाग नरसंहार हुआ था पंजाब की धरती पर इस रक्तरंजित इतिहास के निशान आज भी मौजूद हैं."