पाकिस्तान में धर्मगुरु ने कहा- '10 साल की बच्ची का भी निकाह कराऊँगा'
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान में हाल ही में पारित हुए 'बाल विवाह विरोधी विधेयक 2025' और 'घरेलू हिंसा (रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम 2026' ने देश में एक बड़े संवैधानिक संकट और विवाद को जन्म दे दिया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख और कद्दावर धर्मगुरु मौलाना फजलुर रहमान ने इन कानूनों को सीधे तौर पर मानने से इनकार करते हुए सरकार को खुली चुनौती दे डाली है.
संसद में अपने संबोधन के दौरान मौलाना ने इन संशोधनों को 'असंवैधानिक और गैर-इस्लामी' करार दिया.
मामला तब और अधिक गरमा गया जब फजलुर रहमान ने उकसावे वाला बयान देते हुए घोषणा की कि वह इन कानूनों का 'सार्वजनिक रूप से उल्लंघन' करेंगे.
उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह 10, 12, 15 और 16 साल की नाबालिग बच्चियों के निकाह में न केवल सहयोग करेंगे, बल्कि व्यक्तिगत रूप से उनमें शामिल भी होंगे.
मौलाना का तर्क है कि संसद को उन विषयों पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है जो विशुद्ध रूप से धार्मिक हैं. उन्होंने मांग की है कि इन बिलों को समीक्षा के लिए 'इस्लामिक विचारधारा परिषद' के पास भेजा जाना चाहिए.
शर्मीला फारूकी द्वारा पेश किए गए घरेलू हिंसा अधिनियम के पारित होने के बाद उपजे इस विवाद ने शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
नए कानून के तहत शारीरिक और मानसिक शोषण के साथ-साथ पत्नी को तलाक या दूसरी शादी की धमकी देना भी अपराध माना गया है.
इसके अलावा, शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय कर दी गई है. सरकारी सूत्रों ने कट्टरपंथी बयानों के सामने सरकार की लाचारी पर गहरी चिंता जताई है, जिसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है.