सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

पांच माह बाद भी नहीं उठी धान, बारिश के चलते सड़ रही

धान खरीदी के पांच माह बाद भी नहीं उठी धान

H

Hupendra Sharma

04 जुल. 2025, 08:08 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

धान
धान

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में धान खरीदी बंद हुए 5 माह बीतने के बाद भी प्रदेश के कई खरीदी केन्द्रों में अभी भी धान पड़ा हुआ है. प्रशासनिक लापरवाही के चलते सैकड़ों क्विंटल धान बारिश में भीगकर खराब हो रहा है.


समय पर धान का उठाव नहीं होने से यह संकट खड़ा हुआ है. बारिश से बचाने के लिए धान को कैप कवर से ढंका गया है, लेकिन आंधी-तूफान से अधिकांश कैप कवर फट गए हैं. कई जगह तो स्थिति ऐसी है कि महज दिखावे के लिए कैप कवर लगा हुआ है. बारिश में धान भीगकर अंकुरित होने लगा है. कुछ जगहों में सड़ने की स्थिति भी बन गई है. 

विज्ञापन


प्रदेश के बिलासपुर जिले के धान संग्रहण केन्द्र में करीब 17 हजार 929 मिट्रिक टन धान का उठाव नहीं हुआ है. जिसकी अनुमानित कीमत 7 करोड़ 27 लाख रुपए है. यहां धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है. यहां धान की बोरियों को रखने के लिए कोई खास इंतजाम भी नहीं किया गया है. यहां तक कि चबूतरा भी नहीं बनाया गया है. 


बिलासपुर जिले में धान खरीदी बंद होने के बाद धान को मोपका, भरनी, करगीकला और बिल्हा स्थित धान संग्रहण केंद्रों में एकत्रित किया गया था.


यहां से सीधे मिलरों को धान का उठाव करना था, लेकिन धान का उठाव बहुत धीमी गति से हो रहा है.


बारिश शुरू होने के बाद भी मिलर्स संग्रहण केंद्रों में गिनती के ट्रक भेज रहे हैं. जिस वजह से धान का उठाव नहीं हो पा रहा है.


समय पर उठाव नहीं होने से बारिश में धान सड़कर खराब होने की आशंका है. अधिकारी भी धान के उठाव में तेजी लाने कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. 

बिलासपुर में 17 हजार 929 मिट्रिक टन धान जाम

कहा जा रहा है कि धान उठाने में कम से कम एक महीने का समय और लग सकता है.


वर्तमान में भरनी संग्रहण केंद्र में ही कुल 39,421 मीट्रिक टन धान में से 17,929 मीट्रिक टन का उठाव होना बाकी है.


इसके अलावा मोपका, भरनी, करगीकला और बिल्हा संग्रहण केंद्र में कुल 1,36,629 मीट्रिक टन धान डंप किया गया था. जिसमें से अब तक 74,477 मीट्रिक टन का ही उठाव हो पाया है. अभी भी 62,152 मीट्रिक टन धान इन केंद्रों में जाम है.


यहां धान की बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई हैं. कैप कवर लगे हैं, पर वह फट चुके हैं. जिस वजह से धान ठीक से ढक नहीं पाया है.


बारिश का पानी धान की बोरियों तक पहुंच रहा है. ऐसे में धान के सड़ने और अंकुरित होने की आशंका है. 


जिला विपणन अधिकारी शंभू कुमार गुप्ता का कहना है कि बिलासपुर के साथ ही मुंगेली जिले के धान का भंडारण किया गया है. अभी जो धान बचा है, उसका उठाव करने में करीब एक महीने का समय लग सकता है. धान की नीलामी लगभग सभी केन्द्रों में हो गई है. कुछ जगहों पर नीलामी बची है, जो शीघ्र ही पूरी हो जाएगी.


मरवाही में 825 क्विंटल धान

इधर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी करीब 825 क्विंटल धान का उठाव नहीं हुआ है. यहां तो धान खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है.


जिले की तीन धान खरीदी केंद्रों में धान का उठाव नहीं हुआ है. जिसमें मरवाही धान खरीदी केंद्र में 528.40 क्विंटल, जबकि मरवाही के ही तेंदूमूड़ा में 286 क्विंटल धान उठाव हेतु शेष है.


वहीं सिवनी धान खरीदी केन्द्र में मात्र 40 किलो धान उठाव होना शेष दिखा रहा है. इस तरह जिले में 814. 80 क्विंटल धान तीन खरीदी केंद्रों से उठाव के लिए शेष बताया जा रहा है. 


मरवाही समिति प्रबंधक जगदीश कश्यप का कहना है कि धान उठाव के लिए बार-बार पत्र लिखा गया है. लेकिन कुछ नहीं हो रहा है. मेरी समिति में 528 क्विटंल धान रखा हुआ है. तिरपाल से इसे ढ़का गया है लेकिन पानी के कारण नमी भीतर जा रही है.


इसी तरह विपणन अधिकारी का कहना है कि सॉफ्टवेयर में दिक्कत की वजह से धान का उठाव नहीं हो पा रहा है. जैसे ही ठीक होगा, धान का उठाव कर लिया जाएगा. तब तक समिति धान के रख-रखाव की व्यवस्था करे.


जांजगीर-चांपा के संग्रहण केन्द्र में भरा पानी

इसी तरह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा के अमरताला गांव स्थित धान संग्रहण केन्द्र में बड़ी लापरवाही सामने आई है.


संग्रहण केन्द्र में बारिश का पानी भर गया है. जिससे लाखों क्विंटल धान पानी में भीग गया है.


यहां धान की बोरियां पूरी तरह पानी में डूबी हुई है. अब तो बोरियों से धान अंकुरित होने लगा है.


बताया गया कि यहां से 4 लाख क्विंटल धान का उठाव अभी भी बाकी है.


भीगे धान को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो और भी बड़ा नुकसान हो सकता है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP