छत्तीसगढ़ के आदिवासी छात्रों को सशक्त बनाएगा कोल इंडिया
छत्तीसगढ़ के आदिवासी छात्रों को सशक्त बनाएंगा कोल इंडिया
नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में 76 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में बुनियादी ढांचे के उन्नयन और क्षमता निर्माण के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. इसके तहत मंगलवार नई दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली नेशनल शेड्यूल्ड ट्राइब्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और कोल इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.
इस समारोह में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी उपस्थित थे.
वर्तमान में देश भर में 479 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जो अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और समग्र विकास के अवसर प्रदान करते हैं. ये विद्यालय मंत्रालय की एक प्रमुख पहल हैं, जो आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य करते हैं.
कोल इंडिया ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के तहत इस परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिसे नेशनल शेड्यूल्ड ट्राइब्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन समयबद्ध तरीके से लागू करेगा. इस सहयोग के तहत छत्तीसगढ़ सहित 76 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी:
*1200 कंप्यूटर और 1200 UPS यूनिट
*110 टैबलेट
*420 सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें
*420 सैनिटरी पैड इंसीनरेटर
*कक्षा 10 और 12 के 6,200 से अधिक छात्रों के लिए करियर काउंसलिंग और मेंटरशिप
इस अवसर पर जुआल ओराम ने कोल इंडिया की इस पहल का स्वागत किया और विश्वास जताया कि अन्य कंपनियां भी आदिवासी शिक्षा और विकास के लिए समर्पित कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सहायता के साथ आगे आएंगी. जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोल इंडिया की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है, इस साझेदारी से और व्यापक प्रभाव डालेगी.
परियोजना के उद्देश्य:
*डिजिटल खाई को पाटना: कंप्यूटर लैब की स्थापना से डिजिटल शिक्षा को मजबूत करना और STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, और गणित) में नए अवसर प्रदान करना.
*मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा: छात्राओं की उपस्थिति और प्रदर्शन में सुधार.
*करियर काउंसलिंग और मेंटरशिप: आदिवासी छात्रों को शहरी छात्रों के समकक्ष मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करना.
इस पहल से 30,000 से अधिक आदिवासी छात्रों को लाभ होने की उम्मीद है, जो समावेशी, प्रौद्योगिकी आधारित और समग्र शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है.