नक्सली विश्वनाथ और उसकी पत्नी लता ने किया आत्मसमर्पण
जगदलपुर । संवाददाता: तेलंगाना में नक्सली संगठन के शीर्ष स्तर पर सक्रिय दो दिग्गज माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. करीब चार दशकों से भूमिगत रहकर संगठन को मजबूत करने वाले सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) पसुनूरी नरहरी उर्फ विश्वनाथ और उनकी पत्नी व स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) मेदारा दनम्मा उर्फ लता ने मंगलवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) सीवी आनंद के समक्ष हथियार डाल दिए.
दोनों ही कैडर बिहार और झारखंड के इलाकों में नक्सली गतिविधियों को संचालित करने वाली स्पेशल एरिया कमेटी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे.
आत्मसमर्पण करने वाले 64 वर्षीय पसुनूरी नरहरी का नक्सली सफर साल 1982 से शुरू हुआ था. तेलंगाना के हनमकोंडा निवासी नरहरी ने धीरे-धीरे संगठन में अपनी पैठ बनाई और साल 2017 में माओवादियों की सबसे ताकतवर इकाई 'सेंट्रल कमेटी' में जगह बनाने में कामयाब रहा.
सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह इसलिए भी बड़ा सिरदर्द था क्योंकि वह संगठन के 'टेक्निकल विंग' का सर्वेसर्वा था. नरहरी को अत्याधुनिक घातक हथियार, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG), मोर्टार और बूबी ट्रैप बनाने से लेकर नक्सलियों को इसकी ट्रेनिंग देने में महारत हासिल थी.
इसी साल उसे बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (BJSAC) का सचिव नियुक्त किया गया था.
वहीं उसकी 55 वर्षीय पत्नी मेदारा दनम्मा भी मूल रूप से आंध्र प्रदेश की रहने वाली है और संगठन में राज्य समिति सदस्य जैसे ऊंचे ओहदे पर रहकर सुरक्षा बलों के खिलाफ रणनीतियां तैयार करती थी. इन दोनों के सरेंडर को सुरक्षाबलों की एक ऐतिहासिक सफलता और माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ने वाला कदम माना जा रहा है.