छत्तीसगढ़ में देशव्यापी हड़ताल का मिश्रित असर, बैंकिंग और खनन प्रभावित
रायपुर । संवाददाता: केंद्र सरकार के चार नए श्रम कोड और 'जन-विरोधी' नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का छत्तीसगढ़ में गुरुवार को मिला-जुला असर देखने को मिला. राज्य के कई हिस्सों में राष्ट्रीयकृत बैंकों, डाकघरों और बीमा कंपनियों के बंद रहने से कामकाज बाधित हुआ, जबकि परिवहन और बाजार सामान्य रूप से खुले रहे. कोरबा और रायगढ़ की खदानों में काम काज ठप्प रहा.
राजधानी रायपुर के पंडरी स्थित एलआईसी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की. ट्रेड यूनियन संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने बताया कि इस हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है और इसमें श्रमिक संगठनों के साथ-साथ किसान समूहों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए श्रम कोड 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने और श्रमिकों के अधिकारों व सामाजिक सुरक्षा को खत्म करने के लिए लाए गए हैं.
राज्य के खनिज संपन्न क्षेत्रों, विशेषकर कोरबा में एसईसीएल की कोयला खदानों में खनन कार्य आंशिक रूप से प्रभावित हुआ. हालांकि, दुर्ग जिले में स्थित भिलाई स्टील प्लांट में परिचालन सामान्य रहा और वहां कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ा. रायगढ़ में भी खनन का काम प्रभावित रहा. राज्यभर में हजारों कर्मचारियों और मजदूरों ने रैलियां निकालीं, लेकिन कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है.
ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांगों में चारों श्रम कोड को रद्द करना, ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और शांति (SHANTI) अधिनियम को वापस लेना शामिल है. इसके अलावा, यूनियनें मनरेगा को बहाल करने और 'विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025' को समाप्त करने की मांग कर रही हैं.
इस हड़ताल में इंटक (INTUC), एटक (AITUC), सीटू (CITU) और एचएमएस (HMS) सहित कई प्रमुख संगठन शामिल रहे.