नकटी डिमोलिशन: कांग्रेस ने बताया 'आपराधिक और तानाशाही'
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के अंतर्गत आने वाले नकटी गांव में घरों को ढहाए जाने के मामले में सियासत पूरी तरह गरमा गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर क्रूरता और अवैध तरीके से कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है. कांग्रेस का कहना है कि बिना किसी पुनर्वास योजना के यह मनमानी कार्रवाई की गई है. पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह नहीं ठहराया गया, तो वे कानूनी कदम उठाएंगे.
रायपुर के राजीव भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू ने इस डिमोलिशन ड्राइव को "आपराधिक" और "तानाशाहीपूर्ण" करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने करीब 85 घरों को जमींदोज कर दिया है, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 25 से अधिक मकान भी शामिल थे.
साहू ने कहा कि प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई. उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें इन निर्माणों को अवैध बताया गया था. साहू ने तर्क दिया कि जब इन निवासियों को राशन कार्ड और आधार कार्ड जारी किए गए थे, उन्हें बिजली कनेक्शन मिले थे और केंद्रीय योजना के तहत उनके आवास स्वीकृत हुए थे, तो प्रशासन इन्हें अवैध कैसे कह सकता है?
इसके साथ ही उन्होंने मानवीय मानदंडों का हवाला देते हुए मानसून के दौरान 29 जून को की गई इस कार्रवाई के समय पर भी गंभीर आपत्ति जताई.
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि यह तोड़फोड़ खसरा नंबर 460 का हवाला देकर की गई, जबकि आधिकारिक पत्राचार में कई भूखंडों पर फैले 29.172 हेक्टेयर क्षेत्र को खाली कराने का जिक्र है, जिससे पूरा गांव ही खतरे में आ गया है. उन्होंने साफ कहा कि अगर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी अदालत का रुख करेगी.
दूसरी ओर, कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने वन और आवास बोर्ड मंत्री केदार कश्यप के उस बयान का खंडन किया, जिसमें कश्यप ने नकटी में 'विधायक (MLA) कॉलोनी' बनाने की योजना से साफ इनकार किया था.
आनंद शुक्ला ने अक्टूबर 2024 के एक पत्र का हवाला दिया, जो आवास एवं पर्यावरण सचिव द्वारा कलेक्टर को लिखा गया था. इस पत्र में छठवीं विधानसभा के प्रतिनिधियों के आवास के लिए नकटी में अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया गया था.
उन्होंने आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विधानसभा में दिए गए स्पष्टीकरण का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि नकटी की भूमि विधायकों के आवास के लिए चिह्नित है. शुक्ला ने भाजपा को चुनौती दी कि वे इस परियोजना के संबंध में पिछली कांग्रेस सरकार का कोई भी नोटिस या आधिकारिक आदेश सार्वजनिक करें.
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भी आरोप लगाया कि सरकार तोड़फोड़ से पहले उचित पुनर्वास सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही. उन्होंने कहा कि जो वैकल्पिक व्यवस्था की गई है वह बेहद अपर्याप्त है, जहां 10 से 12 लोगों के परिवारों को बिना पानी और बिजली वाले सिंगल-रूम यूनिट में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
वहीं, जिला शहरी कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन और ग्रामीण अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने सत्ताधारी दल द्वारा मूल निवासियों को अतिक्रमणकारी कहे जाने की तीखी आलोचना की और कहा कि इस विस्थापन से सैकड़ों मवेशी भी बिना आश्रय के भटकने को मजबूर हो गए हैं. कांग्रेस ने इस बेदखली को तुरंत रोकने और विधायक आवास परियोजना के लिए किसी वैकल्पिक भूमि का उपयोग करने की मांग की है.