सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

बस्तर के मूलवासी बचाओ मंच पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ दायर याचिका खारिज

मूलवासी बचाओ मंच पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ दायर याचिका खारिज

C

CG Khabar

05 मई 2025, 08:53 AM 4 मिनट में पढ़ें 3

मूलवासी बचाओ मंच
मूलवासी बचाओ मंच

बिलासपुर | संवाददाता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मूलवासी बचाओ मंच को ग़ैरक़ानूनी संगठन घोषित करने वाली अधिसूचना को चुनौती दी गई थी.


अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व सलाहकार बोर्ड के समक्ष लंबित है, जो इस मामले के साथ विचाराधीन है. इसे देखते हुए हम इस स्तर पर मामले पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हैं. यदि याचिकाकर्ता को खारिज किए गए आदेश से व्यथित किया जाता है, तो वह अन्य विकल्प अपना सकता है.

विज्ञापन


याचिका में कहा गया था कि अधिसूचना जारी होने के बाद, मूलवासी बचाओ मंच के कई सदस्यों को केवल संगठन से जुड़े होने के कारण गिरफ्तार किया गया है, जिसमें याचिकाकर्ता रघु मिडियामी भी शामिल हैं जो इस संगठन के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष हैं. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने दावा किया कि संगठन के खिलाफ एक भी ऐसी घटना का आरोप नहीं लगाया गया है जिसमें यह घोषित किया गया हो कि वह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल है.


अदालत में तर्क दिया गया कि यह पूरी तरह से वीजी रो में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है...पहला तर्क तो ये हैं कि अधिसूचना में अधिनियम के तहत यह कहने के लिए कोई आवश्यक आधार नहीं दिया गया है कि यह वह कारण है जिसके लिए संगठन को गैरकानूनी घोषित किया गया है. दूसरी बात ये कि यदि आप अधिनियम की योजना को देखें और यूएपीए से तुलना करें, तो हमारी दलील वीजी रो में फैसले पर आधारित है, कार्यपालिका किसी संगठन को गैरकानूनी घोषित कर सकती है लेकिन अंततः न्यायिक जांच की जानी चाहिए और उसके बाद ही अधिसूचना प्रभावी हो सकती है. "


इसके बाद राज्य की ओर से महाधिवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध के "कारण बताए गए हैं". उन्होंने अक्टूबर 2024 की अधिसूचना की ओर इशारा किया, जिसमें कहा गया है कि संगठन माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों के खिलाफ "लगातार विरोध कर रहा है और आम जनता को भड़का रहा है." अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि संगठन "कानून के प्रशासन में हस्तक्षेप कर रहा है और कानून द्वारा स्थापित संस्थाओं की अवज्ञा को बढ़ावा दे रहा है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था, शांति भंग हो रही है और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है."


इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें आधार नहीं बताया गया है.


इसके बाद अदालत ने कुछ दस्तावेज़ों को देखने के बाद टिप्पणी की-" ये रिपोर्ट गोपनीय दस्तावेज हैं और इन्हें आपको नहीं दिया जा सकता. और इसी के आधार पर राज्य सरकार और माननीय राज्यपाल ने यह अधिसूचना पारित की है... उनके पास रिपोर्ट है... अगर राष्ट्रीय हित की रक्षा करनी है तो आपको कुछ भी नहीं बताया जाना चाहिए. उनके पास अपनी रिपोर्ट और खुफिया जानकारी है... अगर राज्य सरकार के पास अपनी खुफिया रिपोर्ट है तो वह ऐसा कर सकती है. "


मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह संगठन पंजीकृत नहीं है और वैसे भी यह मामला सीवीजेएसए की धारा 5 के तहत गठित सलाहकार बोर्ड के समक्ष समीक्षा के लिए लंबित है. 


अदालत ने कहा-" अगर यह पंजीकृत संस्था है तो आपको यह कहने का अधिकार है कि इसे प्रतिबंधित क्यों किया गया है. अगर यह एक साधारण संस्था है, जो आपके अनुसार ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है, तो आप केवल कह रहे हैं. लेकिन किसी संगठन को गैरकानूनी घोषित करने के लिए, पहले आपको हमें यह बताना होगा कि क्या इस संगठन की कोई कानूनी वैधता है. आपको पहले यह साबित करना होगा. अन्यथा समाज में इतने सारे लोग हैं कि वे एक संघ चला सकते हैं और गतिविधियाँ कर सकते हैं."

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP