छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला- दहन केवल रावण का, दुर्योधन का क्यों नहीं
रायपुर । संवाददाता: मानवाधिकार आयोग के पास आमतौर पर पुलिस प्रताड़ना, हिरासत में हिंसा और सामाजिक अन्याय से जुड़े गंभीर मामले आते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग (CGSHRC) के सामने हाल ही में एक बेहद अजीब और पौराणिक उलझन से भरी शिकायत पहुंची. दशहरा उत्सव से पहले एक नागरिक ने आयोग में औपचारिक आवेदन दाखिल कर सवाल उठाया कि क्या राक्षस राज रावण का पुतला जलाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है?
शिकायतकर्ता ने दलील दी कि हर साल रावण के पुतले को आग के हवाले करना भेदभावपूर्ण है और यह उसके अधिकारों का हनन है. महाभारत के प्रसंगों का हवाला देते हुए उसने तर्क दिया कि कौरव राजकुमार दुर्योधन ने रावण की तुलना में कहीं अधिक गंभीर और जघन्य पाप किए थे.
ऐसे में यदि बुराई के प्रतीक को ही जलाना है, तो हर साल केवल रावण को ही क्यों निशाना बनाया जाता है और दुर्योधन को क्यों छोड़ दिया जाता है?
इस अनोखी शिकायत पर आयोग ने कानूनी सीमाओं का दायरा स्पष्ट करते हुए मामले को खारिज कर दिया.
आयोग के अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि मानवाधिकार आयोग इंसानों के अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है, न कि पौराणिक बहसों का समाधान निकालता है.
आयोग ने तकनीकी पहलू स्पष्ट करते हुए कहा कि परिभाषा के अनुसार रावण मानव की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसके पुतले के दहन से जुड़ा मुद्दा मानवाधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है.
शिकायतकर्ता को अपनी बात किसी उपयुक्त मंच पर रखने की सलाह दी गई है.
आयोग के अध्यक्ष ने जानकारी दी कि वर्ष 2000 से 2026 के बीच आए लगभग 74,000 मामलों में से 3,000 से 4,000 शिकायतें इसी तरह आधारहीन या अजीबोगरीब थीं, फिर भी आयोग ने अधिकांश मामलों का निपटारा कर दिया है और फिलहाल केवल 900 मामले ही लंबित हैं.