मैरिज एक अनुशासन, लिव-इन में जिम्मेदारी का अभाव- मोहन भागवत
नई दिल्ली । डेस्क: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को विवाह प्रथा, लिव-इन रिलेशनशिप, जेन-जी पीढ़ी और डिजिटल अनुशासन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए. 'विश्व मंगल्या सभा' द्वारा आयोजित 'समकालीन मातृत्व' विषय पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि विवाह एक ऐसा अनुशासन है जो जीवन में धर्म और जिम्मेदारी का भाव जागृत करता है.
इसके विपरीत, लिव-इन रिलेशनशिप पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण और गिरावट है, जहां लोग बिना किसी जिम्मेदारी के केवल सुख की तलाश में साथ रहते हैं और बाद में अलग हो जाते हैं.
हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए और समय के साथ बदलाव भारतीय परंपरा का ही हिस्सा रहा है. उन्होंने समाज में एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय की स्वीकार्यता पर जोर देते हुए कहा कि वे हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं और उन्हें किसी भी तरह से नीची नज़र से नहीं देखा जाना चाहिए.
आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी भावुक है और अनुकरण करने की प्रवृत्ति रखती है, लेकिन जो उन्हें सच्चा और प्रामाणिक लगता है, वह उससे जल्दी प्रभावित होते हैं.
बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने अभिभावकों को 'मोबाइल अनुशासन' का पालन करने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि माता-पिता को खुद सोशल मीडिया पर समय कम बिताना चाहिए और अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करना चाहिए.
ब्रिटिश शासन और पश्चिमी विचारधारा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन परंपराओं को बेकार समझने की मानसिकता को बदलकर हमें अपनी जड़ों और पारिवारिक संवाद को मजबूत करना होगा.