सुकमा में माओवादियों ने की शिक्षादूत की हत्या
बीजापुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादियों ने एक बार फिर कायराना हरकत करते हुए एक शिक्षादूत की हत्या कर दी है. मृतक युवक लक्ष्मण बारसे जगरगुंडा थाना क्षेत्र के पेगड़ापल्ली का निवासी था. वह सिलगेर में बतौर शिक्षादूत काम करता था.
माओवादियों ने उस पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाते हुए मौत की सजा दी है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है.
दरअसल, मृतक युवक लक्ष्मण बारसे का ससुराल सिलगोर था. वह काफी दिनों से अपने ससुराल के स्कूल में बच्चों को बढ़ाने का काम करता था.
यह क्षेत्र धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. बुधवार की रात करीब 8 बजे बड़ी संख्या में माओवादी उसके घर पहुंचे और उससे मारपीट करने लगे.
परिजनों ने बीच बचाव की कोशिश की, लेकिन माओवादियों ने उन्हें डरा-धमकाकर भगा दिया. इसके बाद धारदार हथियार से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी.
बताया जा रहा है कि पहले भी कई बार माओवादी उसे धमकी दे चुके थे. इस घटना के बाद से क्षेत्र में में दहशत और आक्रोश का माहौल है. खासकर शिक्षादूतों में काफी भय है.
अब तक 7 शिक्षादूतों की हत्या
बीजापुर और सुकमा क्षेत्र में इससे पहले भी माओवादी कई शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं. अब तक माओवादी कुल 7 शिक्षादूतों की हत्या पुलिस मुखबिरी के शक में कर चुके हैं.
इनमें से कुछ को तो कथित जनअदालत लगाकर मौत की सजा सुनाई है.
बताया गया कि वर्तमान में सुकमा जिले में 90 और बीजापुर जिले में 191 शिक्षादूत सेवाएं दे रहे हैं. ये सभी स्थानीय युवा हैं, जिन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की है.
शिक्षादूतों को सुकमा में 11 हजार और बीजापुर में 10 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है.
जनअदालत में आदिवासी युवक की हत्या
कुछ दिन पहले ही कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के बिनागुंडा गांव में माओवादी संगठन ने कथित जनअदालत लगाकर एक आदिवासी युवक की हत्या कर दी थी.
माओवादियों ने युवक को पुलिस का मुखबिर करार देते हुए सैकड़ों ग्रामीणों के सामने मौत की सजा सुनाते हुए निर्ममता से उसकी हत्या कर दी थी.
बिनागुंडा गांव के मनेश नुरुटी को बीते सप्ताह हथियारबंद माओवादियों ने उसके घर से उठाया और गांव के बीचोंबीच पहले से इकट्ठा किए हुए ग्रामीणों के बीच लेकर आए.
वहां पहुंचकर माओवादियों ने दो अन्य आदिवासी युवकों की पिटाई की और उन पर भी पुलिस को जानकारी देने का आरोप लगाया.
इसके बाद माओवादियों ने मनेश नुरुटी को पुलिस का मुखबिर बताते हुए जनअदालत में मौत की सजा सुनाई और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी.
घटना के बाद परतापुर एरिया कमेटी ने इलाके में बैनर लगाकर हत्या की जिम्मेदारी ली थी.