महानदी संकट और जल विवाद, निकलेगी चेतना यात्रा
महानदी संकट और जल विवाद पर निकलेगी चेतना यात्रा
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महानदी का संकट और जल विवाद पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया. महानदी पर गहराते संकट को देखते हुए उद्गम से संगम तक महानदी चेतना यात्रा का आयोजन इस वर्ष के अंतिम सप्ताह में प्रारंभ किया जाएगा. इसके अलावा यह निर्णय लिया गया कि दोनों राज्यों छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नदीघाटी को एक इकाई मान कर महानदी बेसिन कार्ययोजना बनाने के लिए संवाद और विमर्श कर जनमत बनाया जाएगा.
दोनों राज्यों के महानदी के किनारे स्थित गांवों की समितियों के प्रतिनिधियों को लेकर महानदी संसद बनाया जाएगा जो प्रमुख रूप से नदी संरक्षण, संवर्धन, पुनर्जनन का कार्य करेंगे. इससे जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं उन्मूलन करने में सहायक होंगे.
रायपुर में यह सम्मेलन नदी घाटी मोर्चा, महानदी बचाओ आंदोलन और राष्ट्रीय जल बिरादरी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था. सम्मेलन में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के महानदी घाटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम जलपुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में हुआ.
जलविवाद और नदी संकट का समाधान
बताया गया कि महानदी जलविवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल तीन बार बढ़ चुका है, लेकिन अभी तक उनके मैंडेट का 10 प्रतिशत पूरा नहीं हुआ है.
अब दोनों राज्यों की सरकार ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के साथ आपस में वार्तालाप कर समाधान निकालने का निर्णय लिया है. लेकिन यह कार्य नदी समुदाय की भागीदारी के बिना संभव नहीं है.
इसलिए सुझाव दिया गया कि ट्रिब्यूनल एवं संबंधित राज्यों को सहयोग करने दोनों राज्यों को जानने वाले नदी विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, जलवायु वैज्ञानिक की उपस्थिति से सलाहकार समिति बनाया जाए.
कहा जा रहा है कि इससे लंबे अरसे से जारी जलविवाद एवं नदी संकट का स्थाई समाधान निकाला जा सकता है.
इसके अलावा महानदी की संस्कृति, साहित्य, नदी अर्थव्यवस्था को मजबूत और समृद्ध करने महानदी समारोह का आयोजन किया जाएगा.
रेत खनन से नदियां खतरे में
महानदी जलविवाद और वर्तमान महानदी के जलप्रवाह को अविरल रखने के लिए दोनों राज्यों की सरकार से मांग की गई है कि महानदी के जल संग्रहण क्षेत्र की पहचान, सीमांकन एवं सुरक्षित रखा जाए.
उसकी मिनिमम एनवायरनमेंटल फ्लो को बरकरार रखते हुए नदी जल संग्रहण क्षेत्र में नदी विरोधी गतिविधियों जैसे जंगल कटाई, अति जल दोहन, अवैज्ञानिक खनिज उत्खनन तत्काल रोका जाए.
बताया गया कि पूरे देश में आज एक बड़ी समस्या है नदी से रेत का अति दोहन. जिससे देश की अधिकांश नदियां आज खतरे में है.
नदी के अस्तित्व पर संकट बढ़ गया है. पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर अपनी चिंता जाहिर की और पुनर्भरण की समीक्षा करे बिना राज्यों को नदी से रेत दोहन की अनुमति न देने का निर्देश दिया.
संयुक्त समिति बनाने का निर्णय
महानदी हमारे देश के छठी बड़ी नदी है जो ओडिशा और छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी है. संस्कृति, साहित्य, समृद्धि का वाहक भी है.
दोनों राज्यों के नदी प्रेमी प्रतिनिधियों ने महानदी का संकट एवं जल विवाद पर विस्तृत चर्चा कर संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया है.
इससे नदी किनारे समुदाय की सक्रिय भागीदारी से महानदी के नदी तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा.
इसके अलावा सम्मेलन में निर्णय हुआ कि इस तरह संयुक्त बैठक दोनों राज्यों में निरंतर की जाएगी ताकि महानदी को अविरल निर्मल बनाया जा सके.
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ग्रामीणों के अलावा गौतम बंद्योपाध्याय राष्ट्रीय संयोजक (नदी घाटी मोर्चा), संजय सिंह राष्ट्रीय संजोयक (जल बिरादरी), सुदर्शन दास संयोजक (महानदी बचाओ आंदोलन), वीरेंद्र पांडे पूर्व विधायक, अजिताभ मिश्रा (पर्यावरण बचाओ प्रदूषण हटाओ संगठन), उमा प्रकाश ओझा आदि उपस्थित रहे.