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लॉस एंजेल्स में तनाव नेशनल गार्ड तैनात

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08 जून 2025, 06:17 PM 4 मिनट में पढ़ें 5

National Guards
National Guards

नई दिल्ली । डेस्क: अमरीका के लॉस एंजेल्स में अवैध अप्रवासन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमरीकी इमिग्रेशन और कस्टम्स इनफोर्समेंट (ICE) ने हाल ही में शहर के कई इलाकों में छापेमारी की, जिसके जवाब में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये. खास तौर पर पैरामाउंट इलाके में शनिवार को हालात हिंसक हो गये, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं. इन प्रदर्शनों ने स्थानीय समुदायों में डर और अशांति का माहौल पैदा कर दिया है.


अमरीकी इमिग्रेशन और कस्टम्स इनफोर्समेंट की कार्रवाइयों का मकसद अवैध अप्रवासियों को हिरासत में लेना था. इस सप्ताह लॉस एंजेल्स में 118 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 44 को शुक्रवार को फैशन डिस्ट्रिक्ट में हिरासत में लिया गया. इन छापों के खिलाफ स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आये. पैरामाउंट में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, पुलिस पर पथराव किया और कुछ वाहनों में आग लगा दी. पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेकर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हिंसक प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए 2,000 नेशनल गार्ड्स की तैनाती का आदेश दिया. उन्होंने कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजकम और लॉस एंजेल्स की मेयर करेन बास पर हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि हिंसा और अराजकता बर्दाश्त नहीं की जायेगी और प्रदर्शनों में मास्क पहनने पर भी रोक लगा दी गई है. उन्होंने नेशनल गार्ड की तैनाती को "कानून-व्यवस्था" स्थापित करने का कदम बताया.


दूसरी ओर, गवर्नर न्यूजकम ने इस तैनाती को "जानबूझकर भड़काऊ" करार देते हुए चेतावनी दी कि इससे तनाव और बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन स्थिति को संभालने में सक्षम हैं और नेशनल गार्ड की जरूरत नहीं है. गवर्नर न्यूजकम ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाये रखने की अपील की, ताकि हिंसा को और बढ़ावा न मिले. मेयर करेन बास ने भी अमरीकी इमिग्रेशन और कस्टम्स इनफोर्समेंट की कार्रवाइयों को "समुदाय में दहशत फैलाने वाला" बताया और हिंसा की निंदा की.


एफबीआई निदेशक काश पटेल और डिप्टी निदेशक डैन बोंगिनो ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी है. पटेल ने कहा कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर हमला करने वालों को जेल भेजा जायेगा, जबकि बोंगिनो ने हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिये वीडियो फुटेज की जांच शुरू करने की बात कही. गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने भी प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.


पैरामाउंट, जहां 80% से अधिक हिस्पैनिक आबादी रहती है, में तनाव विशेष रूप से ज्यादा है. प्रदर्शनकारियों ने "ICE बाहर निकलो" जैसे नारे लगाये और कुछ ने मेक्सिकन झंडे लहराये. सामाजिक संगठनों, जैसे कि कोएलिशन फॉर ह्यूमेन इमिग्रेंट राइट्स, ने इन छापों को "क्रूर" और "अमानवीय" बताया. संगठन की निदेशक एंजेलिका सालास ने कहा कि ये कार्रवाइयां समुदाय के श्रमिकों, माता-पिताओं और परिवारों को निशाना बना रही हैं.


हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने अपनी कार्रवाइयों को उचित ठहराते हुए कहा कि ये छापे उन लोगों के खिलाफ हैं, जिनके पास डिपोर्टेशन ऑर्डर हैं या जिन्होंने आपराधिक गतिविधियां की हैं. प्रशासन ने स्थानीय नेताओं पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित किया जायेगा. इस बीच, प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा, और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.


राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका इस तनाव में अहम है. उनकी सख्त अप्रवासन नीतियों और ICE को बढ़ावा देने से छापेमारी तेज हुईं. ट्रंप ने हिंसा पर नाराजगी जताते हुये 2,000 नेशनल गार्ड्स की तैनाती का आदेश दिया और प्रदर्शनों में मास्क पर रोक लगाई, जिसे कई लोग उकसावे वाला कदम मानते हैं. उनकी बयानबाजी, जैसे प्रदर्शनकारियों को "कट्टरपंथी वामपंथी" कहना, ने माहौल को और गरम किया. 


ट्रंप की नीतियां और नेशनल गार्ड तैनाती ने तनाव को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया, हालांकि स्थानीय नेताओं की ओर से शांति की अपीलों का असर न होने और प्रदर्शनकारियों की हिंसा ने भी स्थिति को जटिल किया. दोनों पक्षों की सख्ती ने लॉस एंजेल्स में अशांति को और गहरा किया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP