सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

कोरबा: बिना नोटिस 25 साल पुराने आदिवासी घरों पर चला बुलडोज़र

C

CG Khabar

17 जून 2026, 01:16 AM 3 मिनट में पढ़ें 3

आदिवासी-कोरबा
आदिवासी-कोरबा

कोरबा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली थाना अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा (खलारीपारा) में वन विभाग और पुलिस प्रशासन की एक संयुक्त कार्रवाई को लेकर भारी जनआक्रोश भड़क गया है. करीब 25 वर्षों से वहां निवास कर रहे गोंड जनजाति के 20 आदिवासी परिवारों का आरोप है कि बीते 13 जून को प्रशासनिक अमले ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के खसरा नंबर 597 पर बने उनके मकानों को जेसीबी मशीनों से पूरी तरह जमींदोज कर दिया. इ


स अचानक हुई कार्रवाई के कारण भारी बारिश के बीच अब ये पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.

विज्ञापन


इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मौके पर जमकर हंगामा और विवाद हुआ. प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि जब घर ढहाए जाने का महिलाओं ने विरोध किया, तो पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार और हाथापाई की. 


पीड़ितों के अनुसार, बुजुर्ग महिला तीज कुंवर (65) के हाथ में गंभीर चोट आई है और राम कुंवर (60) के सिर पर चोट लगी है, जबकि ललिता बाई (35) नामक महिला ने महिला पुलिसकर्मियों पर जबरन घसीटकर घर से बाहर निकालने का आरोप लगाया है. 


इस ध्वस्तीकरण में कांति बाई, शिवकुमारी, श्याम बाई, भवरमति सहित अन्य परिवारों के घर मलबे में तब्दील हो गए, जिससे उनका राशन, कपड़े, बर्तन और घरेलू सामग्री पूरी तरह नष्ट हो गई. ग्रामीणों के मुताबिक, प्रति परिवार करीब 10 से 15 हजार रुपये के सामान का नुकसान हुआ है.


प्रशासनिक रवैये से नाराज होकर सोमवार को बड़ी संख्या में पीड़ित ग्रामीणों ने पाली थाना पहुंचकर दोषियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. तीज कुंवर, राम कुंवर, कुलदीप और ललिता बाई समेत कई ग्रामीणों ने पुलिस को एक लिखित शिकायत सौंपकर मांग की है कि महिलाओं से मारपीट और नियम विरुद्ध कार्रवाई करने वाले वन विभाग व पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए. 


इसके साथ ही प्रभावित आदिवासियों ने मांग की है कि बारिश के मौसम को देखते हुए उन्हें तुरंत रहने के लिए पक्का आवास, राहत सामग्री और उचित मुआवजा दिया जाए.


ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है. उनका कहना है कि यदि बिना पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के किए गए इस कृत्य पर जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी. 


फिलहाल, पुलिस ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर मामले की तफ्तीश में जुट गई है, हालांकि इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम पर अब तक वन विभाग या जिला प्रशासन की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP