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कांकेर: हर साल ग्रामीण बनाते हैं लकड़ी का अस्थाई पुल

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08 अग. 2026, 03:50 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

लकड़ी का पुल-कांकेर
लकड़ी का पुल-कांकेर

कांकेर । संवाददाता: प्रशासनिक उपेक्षा और सालों लंबे इंतजार से तंग आकर भानुप्रतापपुर क्षेत्र के बांसकुंडा गांव के निवासियों ने एक बार फिर मिसाल पेश की है. नदी पर पक्का पुल न होने के कारण ग्रामीणों ने आपस में चंदा और श्रमदान कर एक अस्थायी लकड़ी का पुल तैयार किया है. यह कामचलाऊ पुल अब स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों के लिए गांव से बाहर दुनिया तक पहुंचने का एकमात्र जरिया बन चुका है.


मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ते ही यह लकड़ी का पुल बेहद खतरनाक साबित होता है. ग्रामीण हर साल बारिश से पहले सामूहिक रूप से इस तरह के पुल का निर्माण करते हैं. 

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इससे पहले लोग एनीकट के खंभों से कूदकर या उफनती नदी में पानी के बीच से गुजरने को विवश थे. वाहन न जा सकने के कारण आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को आज भी खाट पर लादकर नदी पार कराना पड़ता है. वहीं किसान भी खाद-बीज अपनी पीठ पर लादकर ले जाने को मजबूर हैं.


ग्राम पंचायत उपसरपंच मनोज कुमार यादव और जनपद पंचायत सदस्य सरोज मरकाम के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय और जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं. 


दूसरी ओर, मामले पर संज्ञान लेते हुए कांकेर के कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने बताया कि प्रस्तावित पुल का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है और प्रक्रिया जारी है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही पक्के पुल का निर्माण कराकर ग्रामीणों की इस जानलेवा समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP