झारखंड शराब घोटाला: ED ने संभाली जांच की कमान
रांची । डेस्क: झारखंड शराब घोटाला जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने औपचारिक रूप से यह जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से अपने हाथ में ले ली है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी खुद की जाँच शुरू कर दी है.
ईडी सूत्रों ने पुष्टि की कि एजेंसी ने एसीबी केस 9/2025 को आधार बनाया है और PMLA के तहत एक समानांतर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) संख्या 10/2025 दर्ज की है.
ECIR दर्ज करने के तुरंत बाद, ED ने रांची की स्पेशल PMLA कोर्ट में याचिका दायर कर ACB द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की अनुमति मांगी. कोर्ट ने यह अनुमति दे दी है, जिसके बाद अब एजेंसी जेल में बंद व्यक्तियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज कर सकेगी.
यह मामला तब शुरू हुआ था जब रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के निवासी विकास सिंह के बयान के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इसे दर्ज किया था.
सिंह ने छत्तीसगढ़ के अधिकारियों अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और अन्य पर शराब घोटाले के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार को अरबों रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप लगाया था.
छत्तीसगढ़ EOW द्वारा FIR (36/2024) दर्ज किए जाने के बाद, रांची ACB ने भी एक प्रारंभिक जांच (PI) दर्ज की थी. इस दौरान ACB ने पूर्व आबकारी सचिव विनय चौबे और गजेंद्र सिंह से कई बार पूछताछ की. इस शुरुआती पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर, ACB ने सरकारी अनुमोदन के बाद शराब घोटाले से संबंधित एक नियमित FIR दर्ज की थी.
मार्च 2025 में छत्तीसगढ़ में दर्ज FIR की जांच पूरी करने के बाद, EOW ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए झारखंड सरकार को लिखा था.
ACB ने कथित शराब घोटाले में अपनी प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद मई में FIR दर्ज की, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे, आबकारी विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह, विनय सिंह, और सात अन्य को आरोपी बनाया गया था.
FIR के बाद, ACB ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया. अब तक इस मामले में एक दर्जन से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें से कई को जमानत मिल चुकी है. ACB अपनी जांच स्वतंत्र रूप से जारी रखे हुए है.