जनऔषधि केन्द्रों ने जनता के बचाये 38 हजार Cr
नई दिल्ली । डेस्क: जनऔषधि केन्द्रों ने देशभर में स्वास्थ्य खर्चे पर जनता के 38 हजार करोड़ रुपयों की बचत की है. जहाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50% से 80% सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं.
जनऔषधि केन्द्रों में 2,110 दवाइयाँ और 315 सर्जिकल, चिकित्सा से जुड़ी वस्तुयें और उपकरण उपलब्ध हैं. जिनमें हृदय संबंधी, कैंसर-रोधी, मधुमेह-रोधी, संक्रमण-रोधी, एलर्जी-रोधी और पेटरोग संबंधी दवाइयाँ और न्यूट्रास्युटिकल्स जैसी सभी प्रमुख दवाईयां मिलती हैं.
यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है. साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 179 जनऔषधि केन्द्र की दुकानें हैं.
इस योजना के अंतर्गत, 30 जून 2025 तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 1,432 केंद्र तमिलनाडु राज्य में खोले गये हैं. सरकार ने 31 मार्च 2026 तक जन औषधि केंद्र की संख्या बढ़ाकर 20,000 करने का निर्णय लिया है. नये जन औषधि केंद्र खोलने के लिये राज्य और केंद्र शासित प्रदेशवार कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं है.
गौरतलब है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने सभी केंद्रीय सरकारी अस्पतालों को केवल जेनेरिक दवाइयाँ लिखने का निर्देश दिया है, और सभी केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना डॉक्टरों और कल्याण केंद्रों को जेनेरिक नाम वाली दवाएँ लिखने के लिये भी इसी तरह के निर्देश जारी किये गये हैं.
इसके अलावा, भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 में चिकित्सा आचार संहिता के पैराग्राफ 1.5 में कहा गया है कि प्रत्येक चिकित्सक को जेनेरिक नामों वाली दवायों स्पष्ट रूप से और अधिमानतः बड़े अक्षरों में लिखनी चाहिये और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दवाओं का तर्कसंगत नुस्खा और उपयोग हो और भारतीय चिकित्सा परिषद ने 22.11.2012, 18.1.2013 और 21.4.2017 को परिपत्र जारी कर सभी पंजीकृत चिकित्सकों को इसका पालन करने का निर्देश दिया है.
जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के मानकों को पूरा करने के लिये नीचे दिए गए आवश्यक उपाय लागू किये गये हैं:
i. दवाइयां केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन - डब्ल्यूएचओ- जीएमपी द्वारा प्रमाणित आपूर्तिकर्ताओं से ही खरीदी जाती हैं.
ii. इस योजना के अंतर्गत आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के प्रत्येक बैच का परीक्षण राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया जाता है और गुणवत्ता परीक्षण में सफल होने के बाद ही दवाओं को जन औषधि केन्द्रों को भेजा जाता है.
iii. विक्रेताओं की सुविधाओं का गुणवत्ता ऑडिट नियमित रूप से भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो द्वारा किया जाता है.