होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का 'पूरा कब्जा': वैश्विक तेल आपूर्ति ठप
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दावा किया है कि उसने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को 'पूरी तरह अपने कब्जे' में ले लिया है. ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि दुनिया का अधिकांश तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है. ईरान के इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई है और तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका गहरा गई है.
शनिवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद से ही स्थिति विस्फोटक बनी हुई है. जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने इस व्यापारिक जलमार्ग की घेराबंदी कर दी है. वर्तमान में हॉर्मुज के मुहाने पर सैकड़ों मालवाहक जहाज और तेल टैंकर कतारों में खड़े हैं, जो न आगे बढ़ पा रहे हैं और न ही पीछे हट पा रहे हैं.
ईरान ने घोषणा की है कि रूस और चीन के जहाजों को छोड़कर किसी भी अन्य देश के टैंकर को यहाँ से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. IRGC के कमांडर-इन-चीफ के सलाहकार इब्राहिम जब्बारी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, "हॉर्मुज का रास्ता बंद कर दिया गया है. यदि कोई भी इस जलमार्ग को पार करने की धृष्टता करेगा, तो उन जहाजों को जलाकर खाक कर दिया जाएगा."
राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा रुख और तत्काल आदेश
ईरान की इस घेराबंदी को तोड़ने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी नौसेना को तत्काल निर्देश दिए हैं कि वे तेल टैंकरों को सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए इस मार्ग से सुरक्षित निकालें.
ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट गहरा जरूर है, लेकिन वे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं देंगे. उन्होंने न केवल नौसेना को बल्कि अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम (DFC) को भी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि ऊर्जा प्रवाह बिना किसी रुकावट के जारी रह सके.
भारत पर प्रभाव और रूस का आश्वासन
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है. हालांकि, भारत सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि देश के पास पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है.
इस बीच, रूस ने संकट के समय भारत का साथ देने का वादा किया है. मास्को ने आधिकारिक रूप से कहा है कि यदि हॉर्मुज संकट के कारण भारत की तेल आपूर्ति में कोई कमी आती है, तो रूस अपनी ओर से भारत की हर मांग को पूरा करने के लिए तैयार है.
लगभग 40 किलोमीटर चौड़े इस संकरे रास्ते पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य गतिरोध और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों और आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है.