Indo-US Trade Deal: किसानों के लिए 'डेथ वारंट'- सुधाकर सिंह
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देश में राजनीतिक पारा गरमा गया है. राष्ट्रीय जनता दल के सांसद और कृषि संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य सुधाकर सिंह ने इस समझौते की तीखी आलोचना करते हुए इसे भारतीय किसानों के लिए "डेथ वारंट" करार दिया है.
पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, तो इसके खिलाफ 'सड़क से संसद तक' व्यापक आंदोलन किया जाएगा.
सुधाकर सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली और समझौते के संभावित परिणामों पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसान संगठनों से परामर्श किए बिना इस समझौते को आगे बढ़ा रही है. उन्होंने कहा, "यह देश के किसानों की राय लिए बिना तैयार किया गया एक मृत्यु पत्र है."
सुधाकर सिंह ने अमेरिकी बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कृषि उत्पादों पर शून्य टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय बाजार विदेशी उत्पादों से भर जाएगा, जिससे घरेलू किसान तबाह हो जाएंगे.
उन्होंने आसियान समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि खाद्य तेल और रबर किसानों को पिछले व्यापार समझौतों से भारी नुकसान हुआ है.
सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार बीज विधेयक, कीटनाशक विधेयक और बिजली (संशोधन) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से भाग रही है.
बाजार सुधारों के सरकारी दावों पर पलटवार करते हुए सुधाकर सिंह ने बिहार का उदाहरण पेश किया. उन्होंने कहा कि बिहार में 2006 में ही APMC (मंडी) व्यवस्था खत्म कर दी गई थी. उन्होंने सवाल किया. "अगर मंडियां खत्म होने से आय बढ़ती, तो पिछले 20 वर्षों में बिहार के किसान सबसे समृद्ध होने चाहिए थे. लेकिन हकीकत यह है कि वहां गरीबी और पलायन बढ़ा है."
सांसद सिंह ने कहा कि किसान सरकार से 'भीख' नहीं बल्कि अपने हक की एमएसपी गारंटी का कानून मांग रहे हैं. उन्होंने दिसंबर 2024 की संसदीय समिति की रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें किसानों की वित्तीय स्थिरता के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी MSP की सिफारिश की गई थी.
जहाँ एक ओर विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारतीय हितों को सरेंडर करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि "कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है" और व्यापार वार्ता में किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में किसानों को एकजुट करने के लिए बैठकें शुरू हो गई हैं.