भारत पर और टैरिफ लगेगा ?
भारत पर और टैरिफ लगेगा? अमेरिकी वित्त सचिव की टिप्पणी से अटकलें
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट की हालिया टिप्पणी ने भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है. हालांकि बेसेंट ने किसी देश का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से संकेत मिलता है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत और चीन, पर और प्रतिबंध या टैरिफ लगाए जा सकते हैं.
बेसेंट ने रविवार को एनसीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उससे तेल खरीदने वाले देशों पर और प्रतिबंध लगाने से संबंधित देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कहा, "यदि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर और प्रतिबंध और टैरिफ लागू कर पाए, तो रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी. इसके बाद ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत की मेज पर आएंगे."
रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत वर्तमान में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि चीन भी इस सूची में शामिल है. बेसेंट ने भारत या चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का निशाना स्पष्ट प्रतीत होता है. पहले भी भारत रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी प्रशासन की आलोचना का सामना कर चुका है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विशेष दोस्ती की बातें होती रही हैं, लेकिन ट्रंप ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर निराशा जताई है.
उन्होंने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाए थे, जिसने भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डाला. हाल ही में एससीओ सम्मेलन में मोदी की चीन यात्रा और रूसी राष्ट्रपति पुतिन व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात ने ट्रंप को नाराज किया था.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की एक तस्वीर साझा कर तंज कसा, "हमने भारत और रूस को चीन के अंधेरे में खो दिया. उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं."
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने अपना रुख नरम करते हुए कहा, "मैंने भारत को नहीं खोया! मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, और यह दोस्ती हमेशा रहेगी. वे बहुत अच्छे प्रधानमंत्री हैं."
मोदी ने भी ट्रंप के इस सकारात्मक रुख का स्वागत किया और कहा कि वे इस दोस्ती को और मजबूत करेंगे.
लेकिन बेसेंट की प्रतिबंधों की चेतावनी ने कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया गर्मजोशी के बावजूद, टैरिफ और प्रतिबंधों की आशंका संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है.
(फोटो- प्रतीकात्मक)