ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाएगा 'इंडिया' गठबंधन
नई दिल्ली । डेस्क: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में एक नया निष्कासन नोटिस लाने की तैयारी कर रहे हैं. राज्यसभा में 24 अप्रैल को दिया गया पिछला आवेदन पहले से ही सभापति सी.पी. राधाकृष्णन के पास लंबित है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है.
'इंडिया' (INDIA) गठबंधन इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने के लिए जल्द ही एक अहम बैठक बुला सकता है. कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से सीईसी के इस्तीफे के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद, विपक्षी दल इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहते और जल्द से जल्द नया नोटिस पेश करने की होड़ में हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने स्पष्ट किया है कि नए खुलासों के आलोक में विपक्षी दल नया प्रस्ताव लाएंगे. उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में सौंपे गए पिछले प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर नौ विशिष्ट आरोप लगाए गए थे, जो अभी भी लंबित है. इस बार के नए नोटिस में और भी अधिक गंभीर और विस्तृत आरोप शामिल किए जाएंगे.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस मुहिम में हर संभव सहयोग देने को तैयार है और विपक्ष को बिना कोई समय गंवाए तेजी से कदम उठाना होगा.
मार्च में खारिज हो चुका है पहला निष्कासन प्रस्ताव
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए विपक्ष ने सबसे पहले 12 मार्च को नोटिस दिया था, जिस पर राज्यसभा के 63 और लोकसभा के 130 सांसदों के हस्ताक्षर थे. उस नोटिस में सीईसी के खिलाफ सात प्रमुख आरोप लगाए गए थे, जिनमें उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए गए थे. विपक्ष का तर्क था कि जिस कानून के तहत यह नियुक्ति हुई है, वह सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. इसके अलावा उनके पुराने प्रशासनिक रिकॉर्ड को लेकर भी पक्षपात के दावे किए गए थे. हालांकि, संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने 7 अप्रैल को इस पहले नोटिस को खारिज कर दिया था.
अप्रैल का नोटिस अब भी राज्यसभा में लंबित
पहले प्रयास के खारिज होने के बाद, विपक्ष ने 24 अप्रैल को केवल राज्यसभा में 73 सांसदों के दस्तखत के साथ 13 पन्नों का एक नया नोटिस सौंपा था. इस दूसरे नोटिस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर नौ गंभीर आरोप लगाए गए थे. इनमें चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता के असमान क्रियान्वयन का मुद्दा प्रमुख था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकारी प्रसारक के माध्यम से विपक्ष पर किए गए हमलों को नजरअंदाज करने का उदाहरण दिया गया था.
इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव आयोग के सोशल मीडिया पोस्ट, केरल में एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज पर भाजपा की राज्य इकाई की मुहर मिलने का मामला, और दिल्ली मुख्यालय में तृणमूल प्रतिनिधिमंडल के साथ सीईसी की नोकझोंक जैसे मुद्दे उठाए गए थे.
नोटिस में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम काटने तथा तमिलनाडु में नौकरशाहों के तबादलों में शक्तियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया था. अब इन्हीं पुराने और नए आरोपों को मिलाकर विपक्ष एक बार फिर से जोरदार ढंग से नया प्रस्ताव लाने की रूपरेखा तैयार कर रहा है.