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सौम्या, विश्नोई की याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से खारिज

वैध स्रोत नहीं है तो मामला अवैध गतिविधियों से जुड़ा- छत्तीसगढ़ HC

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24 जुल. 2025, 03:18 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने धन शोधन मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध आय का सत्यापन योग्य स्रोत नहीं है, तो यह उसकी संपत्ति और अपराध से प्राप्त आय के बीच संबंध स्थापित कर सकता है.


यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कोयला लेवी उगाही मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा संपत्तियों की कुर्की को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज करते हुए की.

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यह मामला कर्नाटक पुलिस द्वारा जुलाई 2022 में दर्ज एक प्राथमिकी से शुरू हुआ, जिसे बाद में जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को हस्तांतरित किया गया. आरोप था कि सूर्यकांत तिवारी के नेतृत्व में एक सिंडिकेट ने राज्य में प्रति टन कोयले पर 25 रुपये की अवैध उगाही की. इस उगाही से प्राप्त धन को सहयोगियों, कंपनियों और बेनामी लेनदेन के जरिये शोधित किया गया.


ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कई व्यक्तियों और कंपनियों की संपत्तियों को कुर्क किया, जिनमें सौरभ मोदी, शांति देवी चौरसिया, अनुराग चौरसिया, मेसर्स इंदरमणि मिनरल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केजेएसएल कोल एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड और नौकरशाह समीर विश्नोई शामिल थे. इन लोगों ने 5 दिसंबर 2024 को दिल्ली के सफेमा अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित कुर्की आदेश को बरकरार रखने के खिलाफ अपील दायर की थी.


उच्च न्यायालय ने अपीलों को खारिज करते हुए ईडी की कार्रवाई को सही ठहराया. कोर्ट ने कहा कि धन शोधन के मामलों में प्रत्यक्ष साक्ष्य प्राप्त करना कठिन होता है, क्योंकि लेनदेन अक्सर जटिल और अपारदर्शी होते हैं. ऐसी स्थिति में, यदि संपत्ति के स्रोत के बारे में कोई स्पष्ट और वैध स्पष्टीकरण नहीं है, तो पीएमएलए की धारा 24 के तहत यह मान लिया जा सकता है कि संपत्ति अपराध से प्राप्त आय से जुड़ी है.


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बैंकिंग चैनलों के माध्यम से लेनदेन होने से संपत्ति को अपराध से मुक्त नहीं माना जा सकता. साथ ही, प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 384 (उगाही) शामिल थी, जिसके आधार पर ईडी ने कार्रवाई शुरू की थी, और इसके लिए अंतिम संज्ञान की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं था.


न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखते हुये कहा कि ईडी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया और कुर्की के लिये पर्याप्त सामग्री प्रस्तुत की. यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि यदि संपत्ति के अधिग्रहण का कोई वैध स्रोत नहीं है और मामला अवैध गतिविधियों से जुड़ा है, तो कोर्ट यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि संपत्ति अपराध की आय से संबंधित है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP