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मुगल काल में हिंदू सुरक्षित थे, धार्मिक अत्याचार के सबूत नहीं: टीएस सिंह देव

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27 दिस. 2025, 02:48 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

टीएस सिंहदेव
टीएस सिंहदेव

दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बाद अब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव के एक बयान ने राज्य में सियासी पारा चढ़ा दिया है. भिलाई में मीडिया से चर्चा करते हुए सिंह देव ने दावा किया कि मुगल शासन के दौरान हिंदू किसी भी खतरे में नहीं थे और उस दौर में धार्मिक आधार पर व्यवस्थित उत्पीड़न का कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है. 


इतिहास में एमए (MA) की डिग्री का हवाला देते हुए सिंह देव ने कहा कि उन्होंने इस विषय का गहराई से अध्ययन किया है और उन्हें ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह सिद्ध हो कि मुगल शासकों ने हिंदुओं पर संगठित अत्याचार किए थे. 

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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी सरगुजा जैसी रियासतें पूरी तरह सुरक्षित थीं.


सिंह देव ने तर्क दिया कि मध्यकालीन भारत में शासन व्यवस्था धार्मिक जबरदस्ती के बजाय आपसी समझौतों और गठबंधनों पर टिकी थी. उनके अनुसार, शासकों की संख्या सीमित थी और वे राज्य चलाने के लिए आपसी संबंधों पर निर्भर रहते थे. 


उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रसार का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह स्वैच्छिक था, न कि बलपूर्वक. 


इस रुख का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मुगलों को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए कहा कि अकबर, जहांगीर और शाहजहाँ जैसे शासकों के पारिवारिक संबंध हिंदू समुदायों में थे, जो व्यवस्थित उत्पीड़न की थ्योरी को खारिज करते हैं. 


इससे पहले भूपेश बघेल ने भी दुर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि मुगल या सल्तनत काल में भी हिंदू कभी खतरे में नहीं रहे और भाजपा-आरएसएस केवल डर फैलाकर राजनीति कर रहे हैं. 


इन बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस नेताओं को 'सनातन विरोधी' करार दिया और उन पर तुष्टिकरण व गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP