छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से मानसून का कोटा सुधरा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार और व्यापक बारिश ने राज्य में मानसून की स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है. इस जोरदार बारिश से न केवल भीषण गर्मी से राहत मिली है, बल्कि खेती-किसानी और जल प्रबंधन के लिए भी बड़ी उम्मीदें जगी हैं. मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में मानसून की इस सक्रियता को व्यापक रूप से सक्रिय घोषित किया है.
33% से घटकर 13% पर आया घाटा:
मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, 6 जुलाई तक राज्य में बारिश का कुल घाटा 33% बना हुआ था, जो दो दिनों की भारी बारिश के बाद घटकर महज 13% रह गया है. 1 जून से 7 जुलाई के बीच राज्य में सामान्य तौर पर 271.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जिसके मुकाबले अब तक 235.5 मिमी संचयी बारिश दर्ज की जा चुकी है. इस सुधार के बाद अब छत्तीसगढ़ को 'सामान्य' बारिश की श्रेणी में रख दिया गया है.
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सबसे ज्यादा बरसे बदरा:
राज्य के जिलों में बारिश का वितरण अब काफी बेहतर हो गया है. कुल 9 जिलों में सामान्य से अधिक (Excess) और 13 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है. केवल 11 जिले ऐसे हैं जहां अब भी पानी की कमी है.
सबसे शानदार प्रदर्शन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का रहा, जहां सामान्य (237.1 मिमी) के मुकाबले 450.5 मिमी बारिश हुई, जो कि 90% की भारी बढ़त है.
इसके अलावा मुंगेली, जांजगीर, बालोद बाजार, रायपुर, सक्ती, खैरागढ़, दंतेवाड़ा, महासमुंद और बालोद में भी झमाझम बारिश हुई है.
वहीं दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, कोरबा और राजनांदगांव जैसे प्रमुख जिले सामान्य श्रेणी में बने हुए हैं. दूसरी ओर, सरगुजा (-52%) और कांकेर (-44%) समेत कुछ जिलों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है.
7 जुलाई को राज्य के कई केंद्रों पर भारी बारिश दर्ज की गई, जिसमें बलरामपुर के कुसमी में 155 मिमी, रायपुर के मंदिर हसौद में 122.1 मिमी और बिलासपुर के पचपेड़ी में 112 मिमी प्रमुख हैं.
खरीफ फसलों को मिला जीवनदान:
इस मानसूनी बारिश ने छत्तीसगढ़ के किसानों की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी है. खेतों में मिट्टी की नमी बढ़ने से अब खरीफ फसलों की बुआई का काम तेजी से आगे बढ़ेगा. पानी की इस रिकवरी से वाटर मैनेजर्स और सिंचाई विभागों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि जलाशयों का जलस्तर भी सुधरने की उम्मीद है.