भिलाई के उद्योगों में गैस संकट, 10 हजार श्रमिकों की रोजी पर खतरा
भिलाई के उद्योगों में गैस संकट, 10 हजार श्रमिकों की रोजी खतरा
दुर्ग । संवाददाता: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थितियों का सीधा प्रहार अब छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गढ़ पर दिखने लगा है. कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में आई भारी गिरावट के चलते दुर्ग-भिलाई जिले के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं.
औद्योगिक गैस की किल्लत ने फोर्जिंग, इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन सेक्टर की कमर तोड़ दी है, जिससे उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.
क्षेत्र के लगभग 400 से अधिक कारखानों में परिचालन ठप होने की स्थिति में है.
आपूर्ति बाधित होने का सबसे गंभीर प्रभाव जिले के करीब 10,000 श्रमिकों पर पड़ रहा है. काम की कमी के कारण कई उद्योगों ने शिफ्ट घटा दी है, तो कहीं मजदूरों को 'जबरन छुट्टी' पर भेजा जा रहा है.
भिलाई के प्रमुख फैब्रिकेशन और केमिकल उद्योगों में कच्चे माल और ऊर्जा संकट के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका प्रबल हो गई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में हड़कंप मचा हुआ है.
संकट के इस दौर में कालाबाजारी भी चरम पर है. जो औद्योगिक सिलेंडर सामान्यतः 1850 रुपये में उपलब्ध होता था, उसकी मांग का फायदा उठाकर उसे 3800 रुपये तक की ऊँची कीमतों पर बेचा जा रहा है.
हालांकि, 'डिजॉल्व एसिटिलीन' (DA) को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सीमित उपलब्धता और एलपीजी की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक लागत ने उद्यमियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. MSME जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष केके झा ने शासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि उद्योगों को बंद होने से बचाया जा सके.