अवैध अफीम खेती मामले में पूर्व BJP नेता विनायक ताम्रकार को HC से मिली राहत
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुए बहुचर्चित अवैध अफीम खेती मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय से पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को बड़ी राहत मिली है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कुछ कड़े प्रतिबंधों के साथ विनायक की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है.
हालांकि, अदालत ने मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR) और पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र को खारिज करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे यह स्पष्ट है कि ताम्रकार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलता रहेगा.
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की कि छापेमारी के दौरान विनायक ताम्रकार मौके पर मौजूद नहीं थे और न ही उनके पास से सीधे तौर पर कोई मादक पदार्थ जब्त किया गया था. केवल खेत में बिजली, पानी, सीसीटीवी उपकरण या सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध कराने के आधार पर अफीम की खेती में उनकी सीधी संलिप्तता तत्काल साबित नहीं होती.
इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, अदालत ने उन्हें दुर्ग सीमा न छोड़ने, जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्तों पर जमानत दे दी.
दूसरी ओर, एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग वाली ताम्रकार की दूसरी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि इस प्रारंभिक चरण में साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल या मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना मुख्य विचारण (ट्रायल) से पहले ही फैसला सुनाने जैसा होगा.
अब इस पूरे प्रकरण की अंतिम सुनवाई ट्रायल कोर्ट में ही संपन्न होगी, जहां 9 सितंबर से गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है.
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 6 मार्च को पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा-झेंझरी गांव में पुलिस, नारकोटिक्स, आबकारी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने खसरा नंबर 309 और 310 पर स्थित करीब 5 एकड़ कृषि भूमि पर दबिश दी थी.
वहां से लगभग 8 करोड़ रुपये मूल्य के अफीम के पौधे बरामद किए गए थे. जांच में यह भूमि मधुमति ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार के नाम पर पंजीकृत पाई गई थी. 7 मार्च को गिरफ्तारी के बाद से ही विनायक ताम्रकार जेल में बंद थे.
पुलिस ने इस वृहद नेटवर्क में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं. अदालत में 78 अभियोजन गवाहों के बयानों पर आधारित 939 पृष्ठों का विस्तृत आरोप पत्र पेश किया जा चुका है.
विनायक ताम्रकार से पहले इस मामले के चार अन्य सह-आरोपियों-सुखराम विश्नोई, मदरूपा राम विश्नोई और विकास बिश्नोई-को भी जमानत मिल चुकी है. वहीं, अफीम का बीज मुहैया कराने के आरोपी आज्ञाराम जाट की जमानत अर्जी जांच लंबित होने के कारण पहले ही खारिज की जा चुकी है.