दंतेवाड़ा: बस्तर के जंगलों को उद्योगपतियों को सौंपने का आरोप
दंतेवाड़ा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आरती स्पंज और डिपॉजिट-4 लौह अयस्क खनन परियोजना के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है. प्रदर्शनकारी नेताओं ने सरकार पर बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को निजी उद्योगपतियों के हाथों में सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि फर्जी ग्राम सभाओं के माध्यम से कागजात तैयार कर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को संकट में डाला जा रहा है.
आंदोलन के दौरान आदिवासी नेताओं ने केंद्र सरकार के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ देश को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ खनन के नाम पर हजारों पेड़ों को काटने की तैयारी है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर क्षेत्र में खनन इतना ही जरूरी है, तो यह काम किसी निजी कंपनी के बजाय सरकारी उपक्रम एनएमडीसी (NMDC) से क्यों नहीं कराया जा रहा?
इस बीच, वन विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरती स्पंज कंपनी ने बिना अनुमति के ही 109 पेड़ काट दिए, जिसके बाद कंपनी के खिलाफ पीयूआर (प्रोसीडिंग्स अंडर रूल्स) दर्ज किया गया है. आदिवासियों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
इसके साथ ही, डिपॉजिट-4 क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को लेकर भी पर्यावरणविदों और स्थानीय समाज ने चिंता जताई है. इस इलाके में बाघों की नियमित आवाजाही के साथ-साथ जुरासिक काल के दुर्लभ 'ट्री फर्न' और कई महत्वपूर्ण वनस्पतियां मौजूद हैं, जो खनन से पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं.
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि दुर्लभ पौधों के संरक्षण के लिए विशेष योजना तैयार की गई है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी पर लगभग पांच हजार पेड़ों को कटाई के लिए चिन्हित किया जा चुका है. आदिवासी समाज ने साफ कर दिया है कि वे अपने अस्तित्व और पर्यावरण की रक्षा के लिए इस आंदोलन को आगे भी जारी रखेंगे.