फिल्म ‘सतलुज’ पर विवाद: जानें सरकार ने क्या दी सफाई
मुंबई । डेस्क: ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के महज दो दिन बाद ही मशहूर अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को हटा लिया गया है. मानव अधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित इस फिल्म को अचानक हटाए जाने के बाद से फिल्म जगत और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. अब इस पूरे मामले पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए फिल्म को हटाए जाने की वजह बताई है.
सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी न करने का आरोप:
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने से पहले आवश्यक प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया था. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिल्म के पास वह अनिवार्य प्रमाणपत्र नहीं था जो किसी भी थियेट्रिकल या सार्वजनिक रिलीज के लिए जरूरी होता है. आरोप है कि फिल्म निर्माताओं ने नियमों का पालन करने के बजाय फिल्म का नाम बदल दिया और सीधे इसे शुक्रवार को ओटीटी पर लाइव कर दिया.
सरकारी अधिकारियों का यह भी दावा है कि यह रिलीज सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, हालांकि मंत्रालय ने अभी तक किसी विशेष धारा या प्रावधान का खुलासा नहीं किया है.
100 कट्स लगाने की थी सिफारिश:
सामने आई जानकारी के मुताबिक, सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में करीब 100 कट्स (बदलाव) लगाने की सिफारिश की थी. आरोप है कि इन बदलावों को लागू करने के बजाय मेकर्स ने फिल्म का नाम बदल दिया और इसे सीधे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का रास्ता चुना. मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि फिल्म को दर्शकों के सामने पेश करने से पहले निर्माताओं की तरफ से मंजूरी या पुनर्विचार के लिए कोई औपचारिक आवेदन उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सेंसरशिप पर सवाल:
फिल्म को हटाए जाने के फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता परगट सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए कहा कि यह दोहरे रवैये को दर्शाता है. परगट सिंह ने तर्क दिया कि एक तरफ जहां सत्ताधारी दल (भाजपा) के समर्थन वाली फिल्मों जैसे 'द केरला स्टोरी' को चुनावों के दौरान जगह-जगह प्रमोट किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ मानवाधिकारों के वास्तविक उल्लंघन और जमीनी सच दिखाने वाली फिल्मों पर रोक लगा दी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कहानियां जनता तक नहीं पहुंचेंगी, तो समाज में सुधार कैसे होगा.
'पंजाब 95' से 'सतलुज' तक का लंबा सफर:
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म का सफर शुरू से ही विवादों से घिरा रहा है. रोनी स्क्रूवाला (RSVP) और मैकगफिन पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं. यह फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी और सेंसर बोर्ड के साथ लंबे समय तक चले कानूनी व तकनीकी विवादों के बाद आखिरकार ओटीटी के जरिए दर्शकों तक पहुंची थी, लेकिन अब एक बार फिर यह कानूनी दांवपेच में उलझ गई है.