कंज्यूमर कोर्ट: स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा पूरा क्लेम
जांजगीर । संवाददाता: बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम भुगतान में टालमटोल करने के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के इस रवैए को सेवा में कमी का स्पष्ट उदाहरण माना है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी और सदस्य महिमा सिंह की पीठ ने पीड़ित के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.
अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा है कि कंपनी द्वारा तय सीमा का हवाला देकर क्लेम रोकना पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
जांजगीर के रहने वाले उपभोक्ता संजय कुमार अग्रवाल ने स्टार हेल्थ से ₹15 लाख की एक पॉलिसी ली थी, जो समय पर रिन्यूअल होने और नो-क्लेम बोनस के जुड़ने के कारण बढ़कर ₹20 लाख की हो गई थी.
तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए मुंबई के प्रसिद्ध कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. वहां उनके दो चरणों में हुए इलाज का कुल खर्च ₹19.60 लाख आया, जो कि उनकी ₹20 लाख की कुल बीमा सीमा के भीतर ही था.
इसके बावजूद, बीमा कंपनी ने पहले दौर के ₹16,32,991 के खर्च में से महज ₹10 लाख का भुगतान किया और जब पीड़ित दोबारा अस्पताल में भर्ती हुए, तो ₹3,27,709 के अतिरिक्त क्लेम को यह कहकर पूरी तरह खारिज कर दिया कि उनकी लिमिट खत्म हो चुकी है.
इस मनमाने रवैए से परेशान होकर जब पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, तो मामले की परतें खुलीं. आयोग ने दस्तावेजों की जांच में पाया कि बोनस राशि को मिलाकर उपभोक्ता का कुल कवर ₹20 लाख था, इसलिए कंपनी का क्लेम रोकने का तर्क पूरी तरह गलत था.
अब अदालत के आदेश के मुताबिक, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को इलाज के खर्च की बकाया राशि ₹9,60,699 का भुगतान तुरंत करना होगा. इसके साथ ही, उपभोक्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में ₹20,000 की क्षतिपूर्ति और अदालती कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹5,000 की अतिरिक्त राशि भी अदा करनी होगी. इस तरह से बीमा कंपनी को कुल 19,85,699 रुपये देना होगा.