कारपोरेट के मुनाफे के लिए कोयला उत्खनन- सौम्या दत्ता
छत्तीसगढ़ के रायपुर में वनों के विनाश, प्रदूषण व जल संकट पर चिंता व्यक्त की
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्य में प्रकृतिक संसाधनों की कारपोरेट लूट, पर्यावरण प्रदूषण और जल संकट को लेकर आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न संगठनों एवं संवेदनशील नागरिकों ने हिस्सा लिया.
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ सौम्या दत्ता ने विश्व में बढ़ते जल-वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग पर अपने विचार रखते हुए बताया कि भारत में कोयले की खपत से अधिक कोयला खदानों का आबंटन किया गया है.
उन्होंने कहा कि आज सौर्य ऊर्जा सबसे बेहतर विकल्प के रूप में हमारे सामने है, परंतु कुछ कारपोरेट के मुनाफे के लिए सरकार कोयला उत्खनन लगातार बढ़ा रही है.
कोयले और लोहे के उत्खनन का छत्तीसगढ़ या भारत की जरूरत से कोई ताल्लुक नहीं है. यह सिर्फ़ जनता से लूटी हुई पूंजी से निवेश करके और सरप्लस निकालने के लिए किया जा रहा है.
कुछ वर्षों में ये परियोजनाएं नॉन प्रॉफिट असेट यानी एनपीए बन जाएंगी और उसकी कीमत भी जानता को ही चुकानी पड़ेगी.
पुलिस फोर्स लगाकर पेड़ काटे जा रहे
हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति से रामलाल करियाम ने हसदेव के संघर्ष को विस्तार से बताते हुए कहा कि हम पिछले एक दशक से अपने जल जंगल जमीन को बचाने के लिए आंदोलनरत हैं, लेकिन हमें न्याय नहीं मिल रहा है.
पुलिस फ़ोर्स की उपस्थिति में परसा कोल ब्लॉक के पेड़ काटे जा रहे हैं, जबकि इस खदान के लिए प्रभावित गांव की ग्राम सभाओं ने कभी भी सहमति नहीं दी.
छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग ने भी ग्राम सभा प्रस्ताव को फर्जी घोषित करते हुए वन स्वीकृति निरस्त करने की अनुशंसा की है. इसके बावजूद सरकार पेड़ों की कटाई नहीं रोक रही है.
पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने कहा कि आज के दौर में अपने जल जंगल और जमीन को बचाने की हमारी बड़ी जिम्मेदारी है.
जिस पैमाने में छत्तीसगढ़ में पेड़ों की कटाई हो रही है, यह चिंताजनक है. विकास की होड़ में हमने न जाने कितने पहाड़ खो दिए, सारी नदिया प्रदूषित कर दी.
एक वैकल्पिक विजन लेकर पर्यावरण के लिए काम करने की जरूरत है.
एक पूँजीपति की लालच का परिणाम है- हसदेव का विनाश
पूर्व विधायक वीरेंद्र पांडे ने प्रदेश में बढ़ते पर्यावरणीय प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि विकास की अंधी दौड़ ने पर्यावरण और प्रकृति के बीच के संतुलन को बिगाड़ दिया है.
आज अनाज, पानी और हवा दूषित हो रही है, जो शरीर में कई बिमारियों के रूप में सामने आ रहा है.
उन्होंने गांधी को याद करते हुए कहा कि यह धरती हमारी ज़रूरत को पूरा कर सकती है, पर किसी एक व्यक्ति के लालच को नहीं.
हसदेव का विनाश भी एक पूँजीपति के लालच के लिए किया जा रहा है.
विधि की छात्रा समा ने रावघाट की समृद्ध जैव विविधता और जंगल के विनाश पर चिंता जताते हुए कहा कि उद्योगपति छत्तीसगढ़ को संसाधन के गढ़ के रूप देख रहे हैं और छत्तीसगढ़ को उजाड़ने की पूरी योजना पर काम चल रहा है, न की आम जानता के विकास के लिए.
1 लीटर एथनॉल बनाने में 8 लीटर पानी का उपयोग
ग्राम पथर्रा से आए अजिताभ मिश्रा ने उनके क्षेत्र में एथनॉल प्लांट से बढ़ते प्रदूषण का जिक्र कर बताया कि 8 गांव के बीच 2 एथनॉल प्लांट से आस-पास के 10 गांव दुर्गंध से परेशान हैं.
1 लीटर एथनॉल बनाने में 8 लीटर पानी का उपयोग हो रहा है, जिससे हमारे क्षेत्र में भूजल तेजी से गिर रहा है. जब भाजपा विपक्ष में थी तो एथनॉल प्लांट का विरोध कर रही थी.
अपने घोषणा पत्र में एथनॉल प्लांट को बंद करने का वादा कर सत्ता में आने के बाद हमें जेल भेजना शुरू कर दिया.
सम्मेलन को रमाकांत बंजारे, डॉक्टर सत्यजीत साहू, आलोक शुक्ला, शोरा यादव, विकास शर्मा, तुहिन देव, अधिवक्ता शालिनी गेरा, दीपक साहू, जूनस तिर्की, संजय पराते आदि ने संबोधित किया.
इसी के साथ वनों के विनाश, प्रदूषण और जल संकट पर विभिन्न संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की.