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ऑनलाइन धोखाधड़ी में चीनी धोखेबाजों का हाथ: ED रिपोर्ट में खुलासा

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03 नव. 2025, 02:09 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

साइबर क्राइम
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नई दिल्ली । डेस्क: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 'डिजिटल गिरफ्तारी' (Digital Arrest) के माध्यम से आम लोगों को धोखा देने के मामलों पर चिंता व्यक्त की है. शीर्ष अदालत पूरे देश में 'डिजिटल गिरफ्तारी' से संबंधित सभी शिकायतों की जांच सीबीआई से कराने पर विचार कर रही है. 


इसी बीच, एक अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय की एक रिपोर्ट में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित नई जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन ऋण देने वाले ऐप्स और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर किए जा रहे धोखाधड़ी चक्रों के मुख्य सरगना मुख्य रूप से चीनी धोखेबाज हैं.

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ईडी पिछले कुछ वर्षों से ऑनलाइन ऋण के नाम पर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच कर रहा है. इसी सिलसिले में जांचकर्ताओं ने 'लोनप्रो', 'फास्टक्रेडिट', 'स्मार्टरुपी' और कुछ अन्य ऐप्स की भूमिका की जांच की. 


ईडी की जांच से पता चला है कि देश के 20 से अधिक राज्यों में हजारों लोगों को बहकाकर फंसाया गया है. इन ऐप्स के माध्यम से लिए गए ऋण को चुकाने के लिए भी 'सख्त नियम' हैं, जिनमें न समझ पाने के कारण कई आम लोग फँस जाते हैं. अतीत में, ऋण चुकाने में असमर्थ होने के कारण कई लोगों ने आत्महत्या का रास्ता भी चुना है.


'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की जांच में यह सामने आया है कि इस प्रकार के ऐप्स के माध्यम से लगभग 28,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है. जांचकर्ताओं को संदेह है कि इनमें से कई मामलों में चीनी धोखेबाजों की संलिप्तता है. 


ईडी की रिपोर्ट के आधार पर, उक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि ये तत्काल ऋण देने वाले ऐप्स अधिकतर अवैध हैं. ये ऐप्स सात से पंद्रह दिनों के लिए ऋण देते हैं. इसके लिए 'प्लेटफॉर्म शुल्क' के रूप में कुल ऋण का 30-40 प्रतिशत काट लिया जाता है. जो लोग यह राशि नहीं चुका पाते, उन पर विभिन्न तरीकों से दबाव बनाया जाता है. 


आरोप है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी भी चुरा ली जाती है और उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है.इसके अलावा, 'एचपीजेड टोकन' नामक क्रिप्टोकरेंसी निवेश की एक ऑनलाइन कंपनी के माध्यम से भी कई लोगों को ठगने की शिकायतें सामने आई हैं. 


क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करके कम से कम 2,200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है. इस मामले की जांच में अब तक 10 चीनी नागरिकों के लिंक मिले हैं और लगभग 500 करोड़ रुपये 'फ्रीज' कर दिए गए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP