रायगढ़ में दम तोड़ती 'डायल 112' सेवा: 16 में से सिर्फ 5 बची
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी आपातकालीन सेवा 'डायल 112' रायगढ़ जिले में खुद ही वेंटिलेटर पर नजर आ रही है. सात साल पहले जिले को सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए जो 16 वाहन सौंपे गए थे, उनमें से वर्तमान में केवल 5 ही चालू हालत में हैं.
शेष वाहन रखरखाव के अभाव में थानों के कोनों में जंग खा रहे हैं. आलम यह है कि पूरे जिले के 17 थानों और 3 चौकियों की सुरक्षा व्यवस्था का दारोमदार महज इन 5 गाड़ियों के कंधों पर सिमट कर रह गया है.
विभागीय उदासीनता और खराब मेंटेनेंस का नतीजा यह है कि 9 वाहन पिछले दो वर्षों से मरम्मत की राह देख रहे हैं, जबकि 2 गाड़ियां पूरी तरह कंडम हो चुकी हैं. तकनीकी रूप से खस्ताहाल इन वाहनों में किसी का स्टेयरिंग फेल है तो किसी का इंजन ही जवाब दे चुका है.
वर्तमान में केवल कोतवाली, कोतरारोड, चक्रधरनगर, खरसिया और कापू थाना क्षेत्रों में ही डायल 112 की सेवाएं मिल पा रही हैं. अन्य क्षेत्रों में सड़क दुर्घटना, मारपीट या प्रसव जैसी इमरजेंसी की स्थिति में पीड़ितों को दूसरे क्षेत्रों से मदद आने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे कीमती समय बर्बाद हो रहा है और लोग निजी वाहनों से अस्पताल जाने को मजबूर हैं.
अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में मेंटेनेंस का जिम्मा संभालने वाली कंपनी की लापरवाही के कारण यह संकट गहराया है.
हालांकि अब जीवीके कंपनी को नया ठेका दिया गया है, लेकिन पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के तहत खराब वाहनों को सुधारने की जिम्मेदारी फिलहाल विभाग की ही है.
इस बीच, डायल 112 के प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार ने आश्वासन दिया है कि होली के बाद कुछ वाहनों की मरम्मत होने से स्थिति में सुधार आएगा. फिलहाल, संसाधनों की कमी से जूझ रही यह योजना जिले में अपने मूल उद्देश्य से भटकती दिख रही है.