कुष्ठ रोग के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी
रायपुर । संवाददाता: भारत ने भले ही साल 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के उन्मूलन का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल कर लिया था, लेकिन आज भी देश के कुछ चुनिंदा राज्य इस बीमारी के बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देश में कुष्ठ रोग के कुल मामलों में से लगभग 50 प्रतिशत बोझ अकेले महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश से आ रहा है. इस बीमारी के पूरी तरह खात्मे और इसके प्रसार को रोकने के लिए अब इन राज्यों के प्रभावित इलाकों में लक्षित और बेहद आक्रामक अभियान चलाने की जरूरत है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अतिरिक्त सचिव और प्रबंध निदेशक आराधना पटनायक ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में यह चिंताजनक जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि साल 2025-26 के दौरान देश में कुष्ठ रोग के 91,783 नए मामले सामने आए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि कई जिलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में इसका संक्रमण अब भी बरकरार है. चिंता की बात यह भी है कि इन नए मामलों में 4.18 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं, जबकि 2.12 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो निदान के समय ही 'ग्रेड-2' विकलांगता (गंभीर रूप से प्रभावित) का शिकार हो चुके थे.
आराधना पटनायक ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के 23, झारखंड के 21, महाराष्ट्र और ओडिशा के 18-18, तथा मध्य प्रदेश के 10 जिलों में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर प्रति 10,000 आबादी पर 1 से अधिक मामले की है.
चंडीगढ़ और ये पाँचों राज्य अभी उप-राष्ट्रीय स्तर पर उन्मूलन का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए अब अंतर-राज्यीय सहयोग बढ़ाने, मजबूत निगरानी रखने, शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान करने और कुष्ठ रोग से जुड़े सामाजिक कलंक व भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन लोगों को पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) के तहत 'सिंगल-डोज रिफैम्पिसिन' दवा देना सुनिश्चित करें जो मरीजों के सीधे संपर्क में आए हैं, ताकि संक्रमण आगे न फैले.
इसी कार्यशाला में कुष्ठ रोग विभाग के उप महानिदेशक डॉ. सुनील वी. गिट्टे ने दिव्यांगता की रोकथाम और प्रभावितों के पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत मरीजों के लिए 1,591 रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरियां की गई हैं. इसके अलावा मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार के लिए 1.03 लाख से अधिक माइक्रो सेलुलर रबर (MCR) फुटवियर और 1.25 लाख से अधिक सेल्फ-केयर किट बांटे गए हैं.
इस दो दिवसीय कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पाँचों राज्यों के करीब 200 अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अंत में एक 'कुष्ठ-मुक्त और दिव्यांगता-मुक्त भारत' के संकल्प के साथ राज्य-विशिष्ट कार्ययोजना तैयार की गई.