छत्तीसगढ़ HC : 6 साल की बच्ची की भरण-पोषण राशि बढ़ाने से इनकार
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायपुर की एक छह वर्षीय बच्ची द्वारा अपने पिता से मिलने वाली भरण-पोषण राशि में वृद्धि की मांग वाली आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने सुनवाई के बाद व्यवस्था दी कि पारिवारिक न्यायालय के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.
यह मामला 10 अक्टूबर 2024 को रायपुर के पारिवारिक न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें बच्ची के लिए 5,000 रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया गया था. बच्ची की मां ने इस राशि को रायपुर के निजी स्कूल के खर्चों और अन्य गतिविधियों के लिहाज से नाकाफी बताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.
याचिकाकर्ता का तर्क था कि बच्ची की शिक्षा और अन्य जरूरतों पर हर महीने लगभग 35,000 रुपये का खर्च आता है.
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पिता ने कोविड-19 लॉकडाउन में नौकरी जाने और माता-पिता पर निर्भर होने का दावा किया था, जबकि उनकी आयकर रिटर्न (ITR) रिपोर्ट कुछ और ही संकेत दे रही थी.
वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु 2020 में हुए आपसी तलाक के दौरान दी गई 36.5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि का था. मां का दावा था कि यह राशि केवल उनके लिए स्थायी गुजारा भत्ता थी, जबकि पिता का तर्क था कि लोक अदालत के समझौते में यह राशि मां और बच्चे दोनों के भविष्य के लिए दी गई थी. कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.