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HC: प्रोफेसर की भर्ती में नियमों को नहीं दी जा सकती ढील

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12 सित. 2025, 05:06 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राज्य सरकार की सेवा नियमों में ढील देने की शक्ति का उपयोग भर्ती की मूल प्रक्रिया को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने एक अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए "एकमुश्त ढील" दी गई थी.


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन पदों को केवल प्रोन्नति के माध्यम से ही भरा जाना चाहिए, जैसा कि वैधानिक नियमों में निर्धारित है.

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मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के एसोसिएट प्रोफेसरों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया. कोर्ट ने 10 दिसंबर 2021 की अधिसूचना को असंवैधानिक और छत्तीसगढ़ मेडिकल शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2013 के खिलाफ पाया.


मामले का विवरण


याचिकाकर्ताओं, जो सभी एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं, ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप सचिव द्वारा जारी 10.12.2021 की अधिसूचना को चुनौती दी थी. इस अधिसूचना में सरकारी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्त पदों को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा भरने के लिए एकमुश्त ढील दी गई थी.


याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 2013 के नियमों के नियम 6 और अनुसूची II के अनुसार, प्रोफेसर का पद "100% प्रोन्नति" द्वारा भरा जाना है. उन्होंने कहा कि इस वैधानिक प्रावधान को एक कार्यकारी अधिसूचना के जरिए नहीं बदला जा सकता. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परंजपे ने तर्क दिया कि अधिसूचना "गैरकानूनी, मनमानी और पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर" थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि नियम 22, जो ढील देने की शक्ति प्रदान करता है, केवल "सेवा शर्तों" तक सीमित है और भर्ती की मूल पद्धति को प्रभावित नहीं कर सकता.


सरकार का पक्ष


राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता संग्राम पांडे ने अधिसूचना का बचाव करते हुए कहा कि यह नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि के कारण आवश्यक थी. उनका दावा था कि प्रोन्नति के लिए योग्य उम्मीदवारों की कमी के कारण राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की मान्यता खतरे में पड़ सकती थी. उन्होंने कहा कि नियम 22 के तहत राज्यपाल को नियमों में ढील देने का अधिकार है.


कोर्ट का विश्लेषण और निष्कर्ष


हाईकोर्ट ने दो मुख्य मुद्दों पर विचार किया: क्या नियम 22 भर्ती की पद्धति में ढील देने का अधिकार देता है और क्या अधिसूचना कानूनी रूप से टिकाऊ थी. कोर्ट ने पाया कि नियम 6 और अनुसूची II स्पष्ट रूप से कहते हैं कि प्रोफेसर के पद 100% प्रोन्नति से भरे जाएंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि नियम 22 का उपयोग मूल नियमों को नजरअंदाज करने के लिए नहीं किया जा सकता.


कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रोन्नति के लिए विचार किया जाना कर्मचारियों का मूलभूत अधिकार है. यदि सीधी भर्ती की अनुमति दी गई, तो याचिकाकर्ताओं के प्रोन्नति के अधिकार को नुकसान पहुंचेगा.


अंतिम फैसला


हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 10.12.2021 की अधिसूचना को रद्द कर दिया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रोफेसर के पद 2013 के नियमों के अनुसार केवल योग्य एसोसिएट प्रोफेसरों की प्रोन्नति से भरे जाएं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP