HC: ISBM यूनिवर्सिटी की PGDRD डिग्री पर रोक, नियुक्तियों पर भी लगा स्टे
बिलासपुर । संवाददाता: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए आईएसबीएम (ISBM) यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदान की जाने वाली रूरल डेवलपमेंट की डिग्री की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. जस्टिस पीपी साहू की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया है कि आगामी सुनवाई तक उन सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी जाए, जिन्होंने संबंधित विश्वविद्यालय से यह विवादित डिप्लोमा प्राप्त किया है.
अदालत का यह रुख उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका है जो इस डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरियों की आस लगाए बैठे थे.
यह पूरा विवाद प्रियांशु दानी और अन्य छह अभ्यर्थियों की याचिका के बाद गर्माया है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित यह डिप्लोमा कोर्स निर्धारित शैक्षणिक मानकों की धज्जियां उड़ाता है.
दरअसल, शिकायतों के बाद सितंबर 2025 में गठित एक उच्च स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी का 'पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट' (PGDRD) पाठ्यक्रम पूरी तरह अवैध है.
तकनीकी बारीकियों के अनुसार, यूनिवर्सिटी इस प्रोग्राम को अपने अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) क्रमांक 57 के तहत चला रही थी, जो मूल रूप से कॉमर्स और मैनेजमेंट संकाय के लिए है, न कि ग्रामीण विकास के लिए.
न्यायालय ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन, उच्च शिक्षा विभाग, यूजीसी (UGC) और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा भी इस पाठ्यक्रम को अमान्य ठहराया जा चुका है. अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी.