फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य में फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर (अग्निशमन बुनियादी ढांचे) को अपग्रेड करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को आगामी 21 जुलाई तक एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सरकार से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या 72 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले की समीक्षा के दौरान साफ किया कि कागजी योजनाओं के बजाय धरातल पर काम दिखना चाहिए.
राज्य सरकार की योजना आधुनिक अग्निशमन उपकरण, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, रेस्क्यू वाहनों की खरीद और प्रदेश भर में 16 नए फायर स्टेशनों की स्थापना के लिए 280 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की है. खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अगली रिपोर्ट में इन सभी प्रस्तावित उपायों के क्रियान्वयन की स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए.
यह निर्देश होम गार्ड्स और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के प्रशिक्षण एवं संचालन निदेशक द्वारा प्रस्तुत की गई स्टेटस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजटीय आवंटन का ब्यौरा दिया गया था.
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर 72.70 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिनका तकनीकी मूल्यांकन चल रहा है.
इसके अलावा, मुंगेली, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर और नारायणपुर समेत 11 जिलों में नए फायर स्टेशनों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है, जिसके लिए जिला प्रशासनों से समन्वय किया जा रहा है. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील मानस वाजपेयी और राज्य सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने रखा.